पुलिस–राजस्व विभाग के ‘जादू’ से सबूत गायब, तहसीलदार पर FIR की तैयारी?
04 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
बलरामपुर/वाड्रफनगर/बसंतपुर | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। पुलिस और राजस्व विभाग की मौजूदगी में जब्त की गई 65 बोरी अवैध धान से लदी एक बिना नंबर की पिकअप गाड़ी अचानक ‘मिस्टर इंडिया’ बन गई—यानि कागज़ों में मौजूद, ज़मीन से पूरी तरह गायब।
मामला बसंतपुर थाना क्षेत्र का है, जहाँ कार्रवाई की तस्वीरें तो हैं, लेकिन जब्त माल और वाहन का कोई अता-पता नहीं।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 जनवरी 2026 की रात ग्राम बसंतपुर (नमोरी) में नायब तहसीलदार द्वारा उत्तर प्रदेश से तस्करी कर लाई जा रही लगभग 65 बोरी अवैध धान से लदी एक बिना नंबर की पिकअप को पकड़ा गया था।
मौके पर बसंतपुर पुलिस की गश्ती टीम भी मौजूद थी। कार्रवाई को ‘दिखाने’ के लिए वाहन और धान के साथ बाकायदा फोटो भी खिंचवाई गईं।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं—
बिना FIR के ‘आजाद’ हुआ अवैध माल
जब्ती के करीब एक महीने बाद तक:
❌ न तो कोई FIR दर्ज हुई
❌ न ही जब्त धान को राजसात/नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई

सूत्रों का कहना है कि बिना नंबर की पिकअप और अवैध धान को किसी ‘ऊपरी दबाव’ या आपसी साठगांठ के चलते चुपचाप छोड़ दिया गया।
यह मामला सीधे-सीधे मोटर व्हीकल एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
संपादक ने खोला मोर्चा, प्रशासन में हलचल
इस ‘अदृश्य खेल’ को लेकर भारत सम्मान न्यूज़ के प्रधान संपादक जितेंद्र कुमार जायसवाल ने कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने 2 फरवरी 2026 को SDOP वाड्रफनगर को औपचारिक आवेदन सौंपते हुए पूरे मामले में FIR दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में उठाए गए तीखे सवाल
➤ किसके आदेश पर अवैध धान और पिकअप को बिना कार्रवाई छोड़ा गया?
➤ फरार ड्राइवर के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
➤ लापरवाही बरतने वाले तहसीलदार और संबंधित पुलिसकर्मियों पर FIR क्यों नहीं?
इस शिकायत की प्रतिलिपि सरगुजा संभाग आयुक्त, IG सरगुजा रेंज, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बलरामपुर को भी भेजी गई है, ताकि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो सके।
जनता पूछ रही सवाल—कहाँ गया धान?
इलाके में चर्चा जोरों पर है कि— जब अधिकारी खुद मौके पर मौजूद थे,
जब फोटो सबूत भी मौजूद हैं,
तो फिर 65 बोरी धान और पिकअप आखिर किसकी शह पर गायब कर दी गई?
क्या यह अवैध धान किसी बड़े तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा था?
और सबसे बड़ा सवाल—
SDM वाड्रफनगर का ‘रोजी रेट मेन्यू’ क्या था?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘गायब’ पिकअप को ढूंढकर दोषियों पर कार्रवाई करता है,
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
