बिलासपुर, 30 जनवरी 2026।
नूतन कॉलोनी, सरकंडा निवासी श्रीमती के. जी. लीलम्मा (पति स्वर्गीय पी. एस. नायर) का 30 जनवरी 2026 को प्रातः 6:45 बजे शांतिपूर्वक निधन हो गया। जीवन के अंतिम क्षणों से पूर्व उन्होंने स्वेच्छा से देहदान करने की इच्छा व्यक्त कर मानवता और समाज सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
उनकी इस महान भावना की जानकारी उनके परिजनों — स. भारतीयन, डॉ. श्रीमती सुप्रिया भारतीयन, स. केरालीयान, अभ्युदय भारत, अद्वैत भारत, श्रीदेवी एवं पार्वती नायर — द्वारा सिम्स चिकित्सालय के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति को दी गई। अधिष्ठाता डॉ. मूर्ति के निर्देश पर शरीर रचना विज्ञान (एनाटॉमी) विभागाध्यक्ष डॉ. शिक्षा जांगड़े के नेतृत्व में आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर देहदान को विधिवत स्वीकार किया गया।

श्रीमती के. जी. लीलम्मा का यह अमूल्य योगदान आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन, प्रयोग एवं शोध के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। यह देहदान चिकित्सा शिक्षा में शरीर रचना विज्ञान की गहन समझ के लिए एक अमूल्य संसाधन के रूप में सहायक रहेगा।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र कैडैवरिक ओथ के अवसर पर यह शपथ लेते हैं —
“यह हमारे चिकित्सा जीवन के प्रथम गुरु हैं। हम इनके शरीर का पूरे सम्मान, श्रद्धा एवं मर्यादा के साथ अध्ययन कर एक कुशल एवं संवेदनशील चिकित्सक बनने का प्रयास करेंगे।”

यह परंपरा विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनशीलता के साथ-साथ देहदाता के प्रति गहन श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न करती है।
इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. अमित कुमार, डॉ. निलेश महोबिया, श्रीमती संज्ञा टंडन (अरपा रेडियो) सहित दिवंगत के परिजन उपस्थित रहे।
सिम्स परिवार ने श्रीमती के. जी. लीलम्मा के इस श्रेष्ठ, प्रेरणादायी एवं समाजोपयोगी योगदान के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा नायर परिवार के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। यह देहदान भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना और गुणधर्मों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
