27 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं जिला स्वास्थ्य तंत्र के संयुक्त तत्वावधान में “रेबीज की रोकथाम एवं पशु काटने के प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नर्सिंग स्टाफ को रेबीज संक्रमण की पहचान, समय पर उपचार एवं मरीजों की प्रभावी देखभाल के लिए प्रशिक्षित करना था।
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान रेबीज की उत्पत्ति, इसके लक्षणों की पहचान और आपातकालीन उपचार की विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि संक्रमित पशु के काटने पर वायरस तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है, लेकिन समय पर टीकाकरण और उचित प्रबंधन से इस जानलेवा बीमारी से बचाव संभव है।

सत्र में नर्सिंग स्टाफ को घाव की तत्काल सफाई, एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) एवं इम्युनोग्लोब्युलिन के उपयोग सहित मरीजों की निगरानी के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि रेबीज एक जानलेवा लेकिन पूरी तरह से रोके जा सकने वाला रोग है, इसलिए समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने प्रत्येक पशु काटने के मामले में सतर्कता बरतने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ठाकुर सहित अन्य चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, इंटर्न्स एवं स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
