27 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर: जिले में बढ़ती गर्मी और पानी की किल्लत के बीच राहत देने वाली एक अहम पहल शुरू की गई है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण-2 के तहत ग्राम पंचायतों में तरल अपशिष्ट (लिक्विड वेस्ट) के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली (DEWATS) को प्राथमिकता दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत 46 गांवों में ग्रे-वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य गांवों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नालियों, नदियों और तालाबों में जाने से रोकना और उसे शुद्ध कर पुनः उपयोग के योग्य बनाना है। इससे न केवल जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा, बल्कि ग्रामीणों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी मिलेगा।
DEWATS तकनीक पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की तुलना में किफायती और पर्यावरण के अनुकूल है। इसमें रासायनिक प्रक्रियाओं के बजाय सूक्ष्मजीवों और पौधों की मदद से पानी का शोधन किया जाता है। इसकी खासियत यह है कि गंदे पानी का उपचार उसी स्थान पर किया जाता है, जहां वह उत्पन्न होता है।
शुद्ध किए गए पानी का उपयोग बागवानी, कृषि और शौचालय फ्लशिंग जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। इससे भूजल स्तर में सुधार और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
जिले में स्वीकृत 46 कार्यों में से 25 पूरे हो चुके हैं, जबकि 21 कार्यों पर तेजी से काम जारी है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल के अनुसार, यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ ओडीएफ प्लस (ODF Plus) लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह योजना टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल समाधान साबित हो रही है, जो आने वाले समय में जल संकट से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।
