22 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में एक बार फिर आधुनिक चिकित्सा तकनीक और डॉक्टरों की सूझबूझ का शानदार उदाहरण देखने को मिला है। महज 5 वर्षीय मासूम नितिन सिंह की जान डॉक्टरों ने समय रहते एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए बचा ली।
जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 7 बजे खेलते-खेलते बच्चे ने ₹5 का सिक्का निगल लिया, जो गले में जाकर श्वसन मार्ग के पास फंस गया। इससे बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी और उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। घबराए परिजन तत्काल बच्चे को सिम्स लेकर पहुंचे।
अस्पताल में आपात स्थिति को देखते हुए बिना देरी उपचार शुरू किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी सूचना दी गई, जिन्होंने तुरंत सिम्स प्रबंधन को बच्चे के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के मार्गदर्शन में ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पांडे के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम का गठन किया गया। टीम में डॉ. विद्या भूषण साहू, डॉ. श्वेता मित्तल, डॉ. तन्मय गौतम, डॉ. बरसे महादेव तथा एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के निर्देशन में डॉ. यशा तिवारी और डॉ. बलदेव नेताम शामिल रहे।
डॉक्टरों ने बच्चे को तुरंत ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में बिना किसी बड़े चीरे के विशेष उपकरणों की मदद से गले में फंसे सिक्के को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया टीम ने बच्चे की सांस और अन्य जीवनरक्षक संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखी।
डॉक्टरों की सतर्कता और बेहतर समन्वय के चलते ऑपरेशन सफल रहा और बच्चे की जान बचा ली गई। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने की सराहना
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस सफलता पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि सिम्स की टीम ने जिस तत्परता और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया, वह सराहनीय है। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है और सिम्स इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि बच्चे की स्थिति बेहद नाजुक थी, लेकिन समय रहते एंडोस्कोपिक हस्तक्षेप से जटिलता टाली जा सकी। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इसे टीमवर्क और त्वरित निर्णय क्षमता का परिणाम बताया।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिम्स में अत्याधुनिक संसाधन, विशेषज्ञ डॉक्टर और समर्पित स्टाफ के चलते गंभीर आपात स्थितियों में भी प्रभावी इलाज संभव है। परिजनों ने भावुक होकर पूरे चिकित्सा स्टाफ का आभार जताया और इसे बच्चे के लिए “नया जीवन” बताया।
