23 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में एक बार फिर जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए डॉक्टरों की टीम ने 22 वर्षीय युवक को नई दृष्टि और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर दिया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई आंख की निचली पलक का सफल ऑपरेशन कर मरीज को बड़ी राहत मिली है।
जानकारी के अनुसार, युवक दिसंबर 2025 में एक सड़क हादसे का शिकार हुआ था, जिसमें उसकी आंख की निचली पलक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस कारण वह अपनी आंख पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहा था। प्रारंभिक उपचार के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तो वह सिम्स के नेत्र रोग विभाग पहुंचा।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान पलक पर बने पुराने कठोर निशान (स्कार टिश्यू) को सावधानीपूर्वक हटाया गया और उन्नत स्किन ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए पलक की संरचना का पुनर्निर्माण किया गया।
यह सर्जरी बेहद जटिल थी, क्योंकि ग्राफ्ट का आकार बड़ा था। इसके बावजूद डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक पलक और गाल के हिस्से का पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख में तेजी से सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से देख पा रहा है। पलक भी पूरी तरह बंद हो रही है, जिससे चेहरे की विकृति समाप्त हो गई है।
इस सफल सर्जरी में डॉ. सुचिता सिंह, डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. कौमल देवांगन, डॉ. विनोद ताम्कनंद, डॉ. डेलीना नेल्सन, डॉ. संजय चौधरी एवं डॉ. अनिकेत सहित नर्सिंग स्टाफ सिस्टर संदीप कौर तथा नेत्र, सर्जरी और निश्चेतना विभाग की टीम की अहम भूमिका रही।
सर्जरी के सफल होने पर मरीज और उसके परिजनों ने सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है और जटिल मामलों में भी उत्कृष्ट परिणाम मिल रहे हैं। वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इसे टीमवर्क और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बताया।
इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के दम पर विश्वस्तरीय उपचार संभव है।
