07 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने और उनकी ठगी गई रकम वापस कराने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री राम गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल मौजूद रहे।

प्रशिक्षण में बिलासपुर रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारियों को मनी रेस्टोरेशन और शिकायत निवारण प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग ने कहा कि केवल साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुलिस की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब पीड़ित की ठगी गई राशि उसे वापस मिल सके।
प्रशिक्षण के दौरान भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के दो प्रमुख मॉड्यूल पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बताया गया कि यदि ठगी की राशि किसी बैंक खाते में फ्रीज हो चुकी है तो कानूनी प्रक्रिया और बैंक समन्वय के माध्यम से उसे पीड़ित के खाते में कैसे वापस कराया जाए। साथ ही ऐसे निर्दोष लोगों या व्यापारियों के खातों को पोर्टल के माध्यम से डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया भी समझाई गई, जिनके खाते जांच के दौरान अनावश्यक रूप से फ्रीज हो जाते हैं।

बिलासपुर ACCU टीम ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अब तक 2 लाख 36 हजार रुपये पीड़ितों को वापस दिलाने में सफलता प्राप्त की है, जबकि 60 प्रकरण वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। इस उपलब्धि पर पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने ACCU प्रभारी गोपाल सतपति एवं उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।
प्रशिक्षण में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल ने हाल ही में सफलतापूर्वक की गई मनी रेस्टोरेशन प्रक्रिया को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने विभिन्न जटिल प्रश्नों के उत्तर देकर पूरी प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया, ताकि अन्य जिले भी इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
आईसीआईसीआई बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने भी बताया कि साइबर ठगी की रकम वापस कराने के लिए बैंकों को किन कानूनी दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों की आवश्यकता होती है।
साइबर अपराधियों की संपत्ति होगी कुर्क:बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी चल-अचल संपत्तियों का विवरण तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए, ताकि मुकदमे के दौरान वे अपनी संपत्ति बेच न सकें और भविष्य में पीड़ितों के नुकसान की भरपाई संभव हो सके।
जनता से अपील:पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ितों को थाने और साइबर सेल के बीच भटकाया नहीं जाएगा। आम नागरिक साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। यदि राशि फ्रीज हो चुकी है तो मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से उसे वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
— सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
