20 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/बेलतरा
बिलासपुर। बेलतरा क्षेत्र में अवैध खनन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। हाल ही में हुई दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार बड़ी घटना के बाद ही सिस्टम सक्रिय होता है, जिससे कई निर्दोषों की जान जा चुकी है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर संयुक्त टीम गठित
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम गठित करने की घोषणा की गई है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में बनाई गई यह टीम कागजों में सख्त कार्रवाई का संकेत देती है, लेकिन आम जनता के मन में अब भी संशय बना हुआ है कि क्या यह कार्रवाई जमीन पर प्रभावी रूप में दिखेगी या केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने उठाए सवाल
इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाले कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बेलतरा में लंबे समय से खनन माफियाओं का दबदबा रहा है। उन्होंने सरवन देवरी रेत घाट में नायब तहसीलदार राहुल साहू पर हुए जानलेवा हमले के प्रयास का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सख्त कदम उठाए जाते, तो हालात आज इतने गंभीर नहीं होते।
नाबालिग की मौत से बढ़ा आक्रोश
हाल ही में नाबालिग अमित कश्यप की मौत ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। गौरहा का कहना है कि यदि पहले ही सख्ती बरती जाती, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। लगातार हो रही घटनाओं से यह साफ है कि जिम्मेदार विभाग अपने दायित्व को लेकर गंभीर नहीं हैं।
तीन साल में 17 मौतें, खनन बेलगाम
आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में अवैध खनन से जुड़े हादसों में 17 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकतर बच्चे और युवा शामिल हैं। जिले में केवल 4 रेत घाट अधिकृत हैं, जबकि 24 से अधिक स्थानों पर अवैध खनन खुलेआम जारी है।
ग्रामीणों की बढ़ती चिंता
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन अब केवल आर्थिक नुकसान का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। तेज रफ्तार डंपर, असुरक्षित खनन और प्रशासन की लापरवाही ने कई परिवारों को दर्द दिया है।
कार्रवाई पर टिकी निगाहें
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यदि यह कार्रवाई ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ लागू होती है, तो वे प्रशासन का आभार जताएंगे। वहीं, अगर यह केवल दिखावा साबित हुई, तो इस मुद्दे को और जोर-शोर से जनता के बीच उठाया जाएगा।
फिलहाल, बेलतरा की जनता की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार खनन माफियाओं पर वास्तव में अंकुश लगेगा या फिर यह पहल भी कुछ दिनों बाद ठंडी पड़ जाएगी।
