16 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। शहर में चोरी और लूट के मामलों के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। सराफा कारोबारियों ने आरोप लगाया है कि अब अपराधी चोरी के जेवरों को खपाने के लिए बैंकों के गोल्ड लोन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया उनके लिए ‘सुरक्षित अड्डा’ बनती जा रही है।

हाल ही में सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई में एक शातिर चोर और मणप्पुरम फाइनेंस के मैनेजर की गिरफ्तारी ने इस पूरे खेल की परतें खोल दी हैं। आरोप है कि आरोपी ने चोरी के जेवरात गिरवी रखकर लोन लिया, वहीं मैनेजर ने भी कथित तौर पर माल के चोरी का होने की जानकारी के बावजूद उसे गलाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 40 ग्राम गला हुआ सोना बरामद किया है।

इस मामले के बाद छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने गहरी चिंता जताई है। प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कागजी औपचारिकताओं के आधार पर गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिया जाता है, जबकि आभूषणों के स्रोत और शुद्धता की गंभीर जांच नहीं की जाती।
उन्होंने कहा कि इसी लापरवाही का फायदा उठाकर अपराधी आसानी से नकदी हासिल कर लेते हैं, जिससे चोरी और लूट की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है।

एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि:
भारी मात्रा में पुराने जेवर लेकर आने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए
गोल्ड लोन प्रक्रिया में सख्त सत्यापन अनिवार्य किया जाए
लोन लेने वाले व्यक्ति के साथ परिवार के सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित हो
सराफा एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रवृत्ति अपराधियों के लिए और भी आसान रास्ता बन सकती है।
