
बिलासपुर। नगर निगम के वार्ड क्रमांक 29 संजय नगर उपचुनाव में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों की निगाहें नतीजों पर टिक गई हैं। सोमवार को सुबह से शाम तक चले मतदान में लगभग 69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, लेकिन पूरे दिन
वार्ड में चुनावी सरगर्मी बनी रही और दोनों प्रमुख दलों ने अपनी जीत को लेकर भरोसा जताया।

संजय नगर सीट कांग्रेस पार्षद रहे स्वर्गीय शेख असलम के निधन के बाद रिक्त हुई थी। ऐसे में इस उपचुनाव को केवल सीट भरने का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और जनाधार की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस ने दिवंगत पार्षद के पुत्र मोहम्मद आजम को प्रत्याशी बनाकर सहानुभूति और पारिवारिक राजनीतिक पकड़ पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने पुराने चेहरे मसूदन राव को उतारकर लंबे समय से चली आ रही हार का क्रम तोड़ने की रणनीति अपनाई है।
मतदान केंद्रों पर व्यवस्था दुरुस्त, सुरक्षा रही कड़ी:वार्ड के दो केंद्रों में स्थापित आठ मतदान बूथों पर मतदाताओं की आवाजाही दिनभर बनी रही। प्रशासन और पुलिस की टीम लगातार निगरानी में जुटी रही ताकि मतदान प्रभावित न हो। मतदान के दौरान किसी बड़ी गड़बड़ी या विवाद की सूचना सामने नहीं आई और प्रक्रिया तय समय में संपन्न हुई।
नेताओं के बीच कहासुनी से कुछ देर गरमाया माहौल:मतदान के दौरान बूथ परिसर में प्रवेश को लेकर कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच विवाद की स्थिति भी बनी। पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, कांग्रेस नेता जावेद मेमन, भाजपा से जुड़े रंगानादम और भाकपा युवा नेता मोनू रजक के बीच तीखी बहस हुई। हालांकि पुलिस ने मौके पर हस्तक्षेप कर स्थिति को तत्काल सामान्य कर दिया।
बूथों के बाहर डटे रहे दोनों दलों के नेता:मतदान समाप्त होने तक कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेता क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिए। समर्थकों के जरिए मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने और माहौल को अपने पक्ष में दिखाने की कोशिशें लगातार चलती रहीं। स्थानीय स्तर के कई वरिष्ठ नेता मतदान केंद्रों के बाहर डटे रहे और परिणाम को लेकर आत्मविश्वास जताते नजर आए।
बदली मतदाता सूची ने बढ़ाई राजनीतिक चुनौती:इस उपचुनाव में मतदाता सूची में हुए बदलाव ने भी चुनावी समीकरण को प्रभावित किया है। विशेष पुनरीक्षण के बाद वार्ड में मतदाताओं की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है। इससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ी। विभिन्न सामाजिक समूहों की संख्या को देखते हुए इस बार जातीय और सामाजिक समीकरण भी निर्णायक भूमिका में माने जा रहे हैं।
गढ़ बचाने और कब्जा जमाने की जंग:वार्ड क्रमांक 29 लंबे समय तक कांग्रेस का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। शेख परिवार का यहां मजबूत राजनीतिक आधार रहा है और लगातार जीत से कांग्रेस की पकड़ कायम रही। दूसरी ओर भाजपा इस सीट को वापसी के अवसर के रूप में देख रही है और संगठनात्मक ताकत के सहारे समीकरण बदलने का दावा कर रही है।
अब नतीजों का इंतजार:मतदान खत्म होने के साथ ही चुनावी प्रचार का शोर थम चुका है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ईवीएम में बंद मत अब तय करेंगे कि संजय नगर में कांग्रेस अपना प्रभाव बरकरार रखेगी या भाजपा लंबे इंतजार के बाद जीत का रास्ता तलाश लेगी।
