13 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
समाज में अक्सर असमय मौत केवल गम और आंसू छोड़ जाती है, लेकिन सिंधी कॉलोनी निवासी स्वर्गीय अखिल सिंधवानी ने अपनी अंतिम विदाई को मानवता की मिसाल बना दिया। मात्र 30 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी उन्होंने दो लोगों के जीवन में उजाला भर दिया।
शोक के बीच लिया मानवता का बड़ा निर्णय
दुख की इस कठिन घड़ी में अखिल के पिता अजय सिंधवानी और उनके परिवार ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। उन्होंने अपने बेटे की यादों को अमर बनाने के लिए हैंड्स ग्रुप, बिलासपुर से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही संस्था के पंकज असरानी और उनकी टीम सक्रिय हुई। सिम्स अस्पताल की मेडिकल टीम—डॉ. संजय चौधरी, डॉ. आरती सिंह और डॉ. रुचि वर्मा—तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे सम्मान के साथ नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
दो जिंदगियों में लौटी रोशनी
अखिल सिंधवानी के इस महान निर्णय से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों की दुनिया रोशन हो सकेगी। उनका यह योगदान समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
“नेत्रदान सबसे बड़ा दान”
इस नेक पहल पर आभार जताते हुए कहा—
“नेत्रदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सबसे बड़ा दान है। एक व्यक्ति का संकल्प दो लोगों के जीवन से अंधेरा मिटाकर नई उम्मीद जगा सकता है।”
समाज के लिए संदेश
अखिल सिंधवानी की यह अंतिम इच्छा हमें एक गहरा संदेश देती है—
मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी और के जीवन की नई शुरुआत बन सकती है।
नेत्रदान जैसे छोटे प्रयास से भी हम किसी की दुनिया बदल सकते हैं।
अखिल भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी अब हमेशा जीवित
