12 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/सकरी
बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र स्थित आसमा सिटी कॉलोनी में सामने आया नाबालिग चोरी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। शुरुआत में घरेलू चोरी के रूप में सामने आए इस मामले में अब नाबालिगों को धमकाकर लाखों रुपये की वसूली के गंभीर आरोप जुड़ने से पूरे घटनाक्रम ने तूल पकड़ लिया है।
SSP से शिकायत, सतीश मिश्रा पर आरोप
मामले में दो नाबालिगों के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर सतीश मिश्रा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एक नाबालिग के साथ मिलकर अन्य बच्चों को निशाना बनाया। परिजनों के अनुसार पहले बच्चों से दोस्ती की गई, फिर सहानुभूति का माहौल बनाकर उनसे पैसों की मांग की गई। विरोध करने पर जान से मारने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई। आरोप है कि इस तरह लाखों रुपये की वसूली की गई, जिसमें बैंक ट्रांजैक्शन का भी इस्तेमाल हुआ।

एक परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी खुद को “पंडित” बताकर जादू-टोना करने की धमकी देता था, जिससे बच्चे मानसिक तनाव में आ गए।
महिला से अभद्रता का आरोप
एक पीड़ित महिला ने शिकायत में बताया कि जब वह अपने बेटे को लेकर आरोपी के घर पहुंची, तो उसके साथ गाली-गलौच, धक्का-मुक्की और जान से मारने की धमकी दी गई।

मामले की शुरुआत: घर से जेवर गायब
ज्ञात हो कि 25 फरवरी 2026 को सतीश मिश्रा ने सकरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके घर की अलमारी से सोने के जेवर गायब हैं और उनकी जगह नकली गहने रख दिए गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि यह चोरी घर के ही नाबालिग बेटे द्वारा की गई थी।

जांच में सामने आए तथ्य
पुलिस के अनुसार नाबालिग ने घर से जेवर निकालकर अलग-अलग स्थानों पर गिरवी रखे थे। प्राप्त राशि से उसने दोस्तों की उधारी चुकाई और शेष रकम अपने निजी खर्च में उपयोग की। इसके कुछ दिनों बाद उसने अपनी मां के एटीएम कार्ड से लगभग 1.85 लाख रुपये भी निकाल लिए, जिन्हें भी खर्च कर दिया गया।

पिता और पुलिस के बीच मतभेद
मामले में सतीश मिश्रा का कहना है कि उनका बेटा अकेले दोषी नहीं है, बल्कि उसे दोस्तों द्वारा दबाव और धमकी देकर ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया। वहीं सकरी थाना प्रभारी का कहना है कि प्रार्थी पहले ही लिखित में कार्रवाई न चाहने की बात कह चुका है और अब बार-बार बयान बदलकर जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।
समझौते के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार गिरवी रखे गए जेवर वापस ले लिए गए हैं और संबंधित पक्षों के बीच समझौता भी हो चुका है। परिवार ने कानूनी कार्रवाई से दूरी बना ली थी, लेकिन इसके बावजूद अब नए आरोपों के सामने आने से मामला फिर चर्चा में आ गया है।
परिजनों की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच, बैंक और कॉल रिकॉर्ड की जांच तथा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
जांच पर टिकी नजरें
फिलहाल यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है—क्या नाबालिग दबाव में था या गलत संगति का शिकार? समझौते के बाद विवाद दोबारा क्यों उभरा? इन सभी पहलुओं का खुलासा अब पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
