11 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/सकरी
बिलासपुर–सकरी थाना क्षेत्र की आसमा सिटी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है। 25 फरवरी 2026 को दर्ज एक शिकायत अब कई ट्विस्ट और सवालों के साथ एक उलझी हुई कहानी बन चुकी है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब सतीश मिश्रा ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि घर की अलमारी में रखे सोने के जेवर गायब हैं और उनकी जगह नकली जेवर रख दिए गए हैं। पहली नजर में यह सीधा चोरी का मामला लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया।

पुलिस जांच में सामने आया कि चोरी किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि घर के ही नाबालिग बेटे ने की थी। उसने घर से जेवर चुपचाप निकालकर अलग-अलग जगह गिरवी रख दिए और उनसे मिले पैसों से दोस्तों की उधारी चुकाई और बाकी रकम अपने शौक में खर्च कर दी।

लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पिता सतीश मिश्रा ने नया दावा करते हुए कहा कि उनका बेटा अकेला दोषी नहीं है, बल्कि उसे उसके दोस्तों द्वारा दबाव और धमकी देकर ऐसा करने पर मजबूर किया गया। इस बयान के बाद मामला और पेचीदा हो गया और सवाल उठने लगे कि क्या नाबालिग खुद भी किसी दबाव का शिकार है।

वहीं सकरी थाना प्रभारी विजय चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता से की गई है। उनके अनुसार प्रार्थी पहले ही लिखित में कार्रवाई न चाहने की बात दे चुका है, लेकिन अब वह बयान बदलकर जांच को गुमराह कर रहा है और मीडिया के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसी बीच घटना के 10-15 दिन बाद एक और बड़ा खुलासा हुआ, जब उसी नाबालिग ने अपनी मां के ATM से ₹1,85,000 निकाल लिए। यह रकम भी दोस्तों की उधारी चुकाने और निजी खर्च में खर्च कर दी गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि मामला एक बार की गलती नहीं, बल्कि लगातार चल रही गतिविधियों का हिस्सा था।
मामले में आगे चलकर गिरवी रखे गए जेवर वापस ले लिए गए और कुछ व्यापारियों से समझौता भी कर लिया गया। दोनों ही घटनाओं में परिवार ने कानूनी कार्रवाई से दूरी बना ली, जिससे मामला घर के भीतर ही सुलझता नजर आया।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—जब प्रार्थी खुद कार्रवाई नहीं चाहता और मामला सुलझ चुका था, तो फिर मीडिया में आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं? क्या सच में नाबालिग दबाव में था या यह केवल गलत संगति और पारिवारिक उलझन का नतीजा है?
यह मामला सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने बच्चों की संगति पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं, क्या आर्थिक दबाव और दिखावे की चाह उन्हें गलत रास्ते पर ले जा रही है, और क्या परिवार में संवाद की कमी ऐसे मामलों को जन्म दे रही है।
फिलहाल मामला पूरी तरह साफ नहीं है और सच्चाई क्या है, यह आने वाले समय और जांच पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना तय है कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है और असली सच सामने आना बाकी है।
