06 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
23 साल बाद जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला
बिलासपुर -छत्तीसगढ़ की राजनीति को झकझोर देने वाले बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में आखिरकार 23 साल बाद बड़ा मोड़ आ गया है। राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए अमित जोगी को दोषी ठहराया है और उन्हें तीन हफ्तों के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
कैसे हुई थी हत्या – 4 जून 2003 की वो रात
4 जून 2003 की रात रायपुर के मौधापारा इलाके में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी अपनी कार से जा रहे थे। उसी दौरान अचानक उन पर गोली चला दी गई। गंभीर रूप से घायल जग्गी को पुलिस पहले थाने और फिर अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
यह वारदात मौधापारा थाना क्षेत्र के पास हुई, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई। राजनीति में मचा था भूचाल
उस समय राज्य में अजित जोगी की सरकार थी और छत्तीसगढ़ बने महज ढाई साल ही हुए थे।

जग्गी, विद्याचरण शुक्ला के बेहद करीबी माने जाते थे और दोनों ने कांग्रेस छोड़कर एनसीपी का दामन थामा था।
10 जून 2003 को एनसीपी की बड़ी रैली प्रस्तावित थी
रैली में शरद पवार जैसे बड़े नेता आने वाले थे
इस रैली को सत्ताधारी कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक खतरा माना जा रहा था,इसी वजह से विपक्ष ने इस घटना को “राज्य गठन के बाद की पहली राजनीतिक हत्या” करार दिया।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप,हत्या के तुरंत बाद जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने एफआईआर दर्ज कराते हुए सीधे तौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अजित जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर साजिश रचने का आरोप लगाया।
शुरुआत में पुलिस ने इसे लूट का मामला बताया, लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव और विरोध के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच और लंबी कानूनी लड़ाई,सीबीआई ने मामले की गहराई से जांच की और इसे साजिशन हत्या बताया।मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहा, जिसमें कई बार फैसले बदले और अपीलें दायर हुईं।
अब आया बड़ा फैसला,करीब 23 साल बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को सही मानते हुए: अमित जोगी को साजिश का दोषी ठहराया, तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया,इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। क्यों अहम है ये फैसला?यह मामला छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याओं में से एक रहा है,फैसले ने एक बार फिर पुराने राजनीतिक विवादों को जिंदा कर दिया
आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासत पर देखने को मिल सकता है