23 मार्च 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। जिले में ‘उल्लास’ योजना के अंतर्गत आयोजित साक्षरता आकलन परीक्षा ने जनभागीदारी का नया इतिहास रच दिया। जिले के चारों विकासखंडों सहित केंद्रीय जेल बिलासपुर में आयोजित इस परीक्षा में 40,777 से अधिक असाक्षर प्रशिक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर साक्षरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।
इस परीक्षा का आयोजन कुल 961 केंद्रों पर शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से किया गया। प्रतिभागियों में 10,943 पुरुष और 29,822 महिलाएं शामिल रहीं। महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत रही, जिसे राज्य स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
‘उल्लास’ केंद्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय भाषा में पढ़ना-लिखना, आधारभूत गणित, डिजिटल साक्षरता और जीवनोपयोगी ज्ञान दिया गया, जिससे वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो सकें।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि “उल्लास योजना के जरिए बिलासपुर को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। 40 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।”
इस अभियान के तहत केंद्रीय जेल बिलासपुर में भी 100 पुरुष और 33 महिला बंदियों ने परीक्षा देकर साक्षरता की ओर कदम बढ़ाया। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर कोटा विकासखंड के आदिवासी अंचलों से भी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली।
परीक्षा केंद्रों में सास-बहू, ननद-भौजाई, तीन पीढ़ियों के सदस्य, बुजुर्ग दंपति, नवविवाहित जोड़े, दिव्यांगजन और छोटे बच्चों के साथ परीक्षा देने आई माताएं आकर्षण का केंद्र रहीं, जिससे यह अभियान एक सामाजिक उत्सव जैसा नजर आया।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, ‘उल्लास’ योजना के प्रभाव से जिले की साक्षरता दर में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी राज्य स्तर पर सराहना की जा रही है।
परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की थीं। केंद्राध्यक्षों, पर्यवेक्षकों, समन्वय समितियों और निरीक्षण दलों की सक्रिय भूमिका के साथ-साथ ग्राम पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से यह अभियान सफल रहा।
यह पहल छत्तीसगढ़ को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।
