19 मार्च 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। शहर में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता जे. पी. देवांगन ने वन अधिकार, आदिवासी बेदखली और हसदेव अरण्य के संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों को उठाते हुए सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि कई आदिवासी परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से जंगलों में निवास कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें वन अधिकार पट्टा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि जिनके दावे लंबित हैं, उनके खारिज होने तक किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में आदिवासियों की झोपड़ियां तोड़ी गईं और लगभग 36 घरों को जलाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जो बेहद गंभीर हैं। इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए एसटी-एसटी एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई है।
जे.पी. देवांगन ने यह भी आरोप लगाया कि 22 तालाबों से अतिक्रमण हटाने में नगर पंचायत द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि तालाबों की जमीन पर अवैध रूप से कॉम्प्लेक्स निर्माण किया जा रहा है, जो पर्यावरण और जनहित दोनों के खिलाफ है।
वहीं हसदेव अरण्य क्षेत्र में हो रही जंगल कटाई और कोयला खनन को लेकर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और इसे तत्काल रोकने की मांग की।
प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने कहा कि “आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
इस प्रेस वार्ता के बाद क्षेत्र में इन मुद्दों को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
