08 मार्च 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/कोटा
8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। अपने हौसलों और आत्मविश्वास के दम पर महिलाएं अब हर क्षेत्र में पहचान बना रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं न केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।
कोटा विकासखंड के विचारपुर पंचायत के आश्रित ग्राम जुरेली की सुशीला बाई की जिंदगी में सरकारी योजनाओं ने नई उम्मीद जगाई है। पहले सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था, लेकिन स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका का साधन मिला और आत्मविश्वास भी बढ़ा। वहीं महतारी वंदन योजना से हर माह मिलने वाली एक हजार रुपए की सहायता से घर के खर्च और बच्चों की जरूरतें पूरी करने में उन्हें काफी मदद मिल रही है।
इसी तरह ग्राम सिलपहरी की उर्वशी भानू भी इस योजना का लाभ लेकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। वे स्व-सहायता समूह से जुड़कर टेंट व्यवसाय चला रही हैं, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि यह योजना उनके लिए बड़े सहारे के समान है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च आसानी से पूरे हो रहे हैं।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक और प्रेरक कहानी बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रमतला की विजेता रामसनेही उर्फ अन्नू कोरी की है। उन्होंने रेशम और कोसा बीज उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रमतला रेशम अनुसंधान एवं विकास केंद्र से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने एक माह में करीब 12 हजार कोसा बीज तैयार किए और लगभग 40 हजार रुपए की आय अर्जित की। उनकी इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया। साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर भी मिला है और बच्चों को छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के माध्यम से मस्तूरी विकासखंड के ग्राम कर्रा में महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने “बर्तन बैंक” की अनूठी पहल शुरू की है। गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष गौरी यादव के अनुसार पहले गांव में शादी-ब्याह और कार्यक्रमों में प्लास्टिक और थर्माकोल के डिस्पोजल का उपयोग अधिक होता था, जिससे गंदगी और प्रदूषण बढ़ता था। इसे देखते हुए महिलाओं ने सामूहिक रूप से स्टील के बर्तन खरीदकर बर्तन बैंक की शुरुआत की। अब गांव में होने वाले कार्यक्रमों के लिए बर्तन किराए पर दिए जाते हैं, जिससे डिस्पोजल का उपयोग लगभग बंद हो गया है और गांव का वातावरण भी स्वच्छ बना हुआ है। साथ ही इससे
समूह की महिलाओं की आय भी बढ़ रही है।
सरकारी योजनाओं और अपनी मेहनत के दम पर ग्रामीण महिलाएं सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। महिलाएं बताती हैं कि नरेंद्र मोदी और विष्णु देव साय की सरकार की योजनाओं ने उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है। इन पहलों से न केवल महिलाओं का जीवन संवर रहा है, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज और देश के विकास पर भी दिखाई दे रहा है।
