15 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा बिलासपुर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन जिला न्यायालय परिसर स्थित नवीन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। इस महत्वपूर्ण सेमिनार में बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा एवं मुंगेली जिलों से कुल 119 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता कर विधिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दीप प्रज्वलन कर सेमिनार का शुभारंभ किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु एवं न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद सहित उच्च न्यायालय के अनेक न्यायाधीशगण गरिमामयी उपस्थिति में शामिल हुए।
अपने प्रेरक उद्बोधन में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि न्यायिक विवेक का प्रयोग सदैव वैधानिक प्रावधानों और स्थापित विधिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सेमिनार न्यायिक अधिकारियों को विधि एवं प्रक्रिया की गहन समझ विकसित करने तथा न्यायिक कार्य की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया संबंधी नियम मात्र औपचारिकताएं नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए महत्वपूर्ण आधार हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन संवेदनशीलता, सतर्कता और संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ करें, जिससे न्याय प्रणाली में आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने विधिक सिद्धांतों के पालन को न्यायिक विश्वसनीयता का आधार बताया।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की नव परिवर्तित आधिकारिक वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। आधुनिक और उपयोगकर्ता-अनुकूल इस वेबसाइट के माध्यम से न्यायिक प्रशिक्षण, शिक्षा, प्रकाशन एवं अकादमी की गतिविधियों से संबंधित जानकारी अब और अधिक सहजता से उपलब्ध हो सकेगी।
सेमिनार में जमानत में समानता के सिद्धांत, धारा 138 एनआई एक्ट की प्रक्रिया, डिक्री निष्पादन, उत्तराधिकार कानून, आदिवासी रूढ़िगत विधि की प्रासंगिकता तथा वसीयत के वैधानिक निष्पादन जैसे महत्वपूर्ण विधिक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतीकरण और विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर द्वारा दिया गया, जबकि अकादमी के निदेशक ने परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया। अंत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारीगण, बिलासपुर संभाग के न्यायिक अधिकारी, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
