15 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और तनाव प्रबंधन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा भवन में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के सभी शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्य तथा विभिन्न कोचिंग संस्थानों के संचालकों ने सहभागिता कर विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कलेक्टर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक बच्चे की रुचि और क्षमता अलग होती है, इसलिए अभिभावकों को अपनी अपेक्षाएं बच्चों पर थोपने के बजाय उनकी योग्यता के अनुरूप मार्गदर्शन देना चाहिए। उन्होंने कहा कि “99 प्रतिशत की दौड़” से बच्चों को दूर रखना और उन्हें संतुलित एवं सकारात्मक वातावरण देना समय की आवश्यकता है।
असफलता को सीख का अवसर मानें, तनाव से निपटने की क्षमता विकसित करें।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और आनंदमय वातावरण तैयार करें, जिससे बच्चों के मन में उत्पन्न तनाव, भय और संशय को कम किया जा सके।
कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता डॉ. सुजाता पांडेय ने जीवन कौशल, भावना नियंत्रण, मानसिक संतुलन और आत्महत्या रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि सही मार्गदर्शन, संवाद और सकारात्मक सोच से विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय टांडे, सहायक कार्यक्रम समन्वयक सुश्री आरती राय, डॉ. अखिलेश तिवारी, श्री अखिलेश मेहता सहित विभिन्न कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों और अभिभावकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया, जिससे भविष्य में तनावमुक्त और सशक्त युवा पीढ़ी का निर्माण संभव हो सके।
