17 दिसम्बर 2025
सीजी क्राइम रिपोर्टर…..
बिलासपुर:–सिम्स अस्पताल में महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और आधुनिक उपचार पर एक दिवसीय निरंतर चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी नवीनतम चिकित्सीय जानकारी और तकनीकों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम में देशभर से लगभग 200 प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े, जबकि छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों से आए डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मी सीधे उपस्थित रहे।

विशेषज्ञ वक्ताओं ने सर्वाइकल कैंसर के कारण, जोखिम कारक, शुरुआती लक्षण, पैप स्मीयर व एचपीवी टेस्ट जैसी जांच तकनीकें और उपलब्ध उपचार विधियों पर विस्तार से व्याख्यान दिया। बताया गया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल है, लेकिन नियमित जांच, एचपीवी टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और समय पर उपचार से इसके अधिकांश मामलों की रोकथाम संभव है। सत्रों के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर में प्रतिभागियों ने अपनी शंकाएँ रखीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सिम्स अधिष्ठाता डॉ. मधुमिता मूर्ति थीं। आयोजन समिति में चेयरमैन डॉ. मानू प्रताप सिंह (प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी, सिम्स बिलासपुर तथा चिकित्सा अधीक्षक सह संयुक्त संचालक, केएसएसडीएसजे शासकीय सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल कोनी), ऑर्गनाइजिंग को-चेयरमैन डॉ. साधना बागड़े (एसोसिएट प्रोफेसर) और ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. चित्रांगी पी. बरपाण्डेय (एसोसिएट प्रोफेसर, पैथोलॉजी विभाग, सिम्स) शामिल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत विशिष्ट वक्ता डॉ. सुप्रिता नायक (जीएमसी नागपुर) के व्याख्यान से हुई, जिन्होंने सर्वाइकल कैंसर के ग्लैंड्युलर लीजन विषय पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला को सफल बनाने में डॉ. ज्योति पोते, डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय सिंह, डॉ. आकृति शर्मा, डॉ. रश्मि नायक, डॉ. मनोज क्षत्री, डॉ. ईशान साहू, डॉ. रश्मि साहू, डॉ. नागेन्द्र साहू, डॉ. प्रभाकर प्रधान, डॉ. सौम्य रंजन, डॉ. प्रशांत ठाकुर, डॉ. असीम आनंद मसीह, डॉ. मुकुन्द शर्मा तथा समस्त पीजी छात्रों का विशेष योगदान रहा।
