17 दिसम्बर 2025
सीजी क्राइम रिपोर्टर…..
छत्तीसगढ़ –
बिलासपुर:–22 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित विराज कोल वॉशरी की जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। कलेक्टर बिलासपुर को दिए गए लिखित आवेदन में ग्राम अमाली और आसपास के ग्रामीणों ने जनसुनवाई को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत अमाली में पेसा एक्ट लागू होने के बावजूद न तो ग्राम सभा की वैध सहमति ली गई और न ही पेशा समिति से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। आरोप है कि कंपनी के पास जो एनओसी है, वह फर्जी है और नियमों का खुला उल्लंघन है।

आवेदन में कहा गया है कि जिस भूमि पर उद्योग स्थापित होना है उसका औद्योगिक डायवर्शन ही नहीं कराया गया, फिर भी जनसुनवाई तय कर दी गई। साथ ही जनसुनवाई ग्राम अमाली में न रखकर 6 किमी दूर जनपद कोटा के शासकीय निरंजन महाविद्यालय में रखी गई है, जिससे ग्रामीणों को शामिल होने में कठिनाई हो और दलालों के जरिए पैसे व शराब बांटकर सहमति जुटाने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि ग्राम अमाली तक पहुंचने वाला मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित है, जिसकी क्षमता 12 टन है, जबकि कोयला लाने-जाने वाले भारी वाहनों का वजन 80 से 120 टन तक होता है। ऐसे में सड़क जर्जर होने, दुर्घटनाओं और अकाल मौतों की आशंका जताई गई है और भारी वाहनों की आवाजाही को अपराध की श्रेणी में बताया गया है।

कंपनी की ईआईए रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने कहा है कि प्रस्तावित स्थल से महज 6 किमी की दूरी पर टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट एरिया शुरू होता है, जिसका उल्लेख रिपोर्ट में ही नहीं किया गया। रिपोर्ट तैयार करने वाली कंसल्टेंट कंपनी पर एफआईआर और उसका पंजीयन निरस्त करने की मांग की गई है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कंपनी डायरेक्टर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जमीन किससे खरीदी गई, जबकि क्षेत्र आदिवासी बहुल होने के कारण सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति के नाम पर इतनी बड़ी (लगभग 9 हेक्टेयर) जमीन होना संभव नहीं है। ग्रामीणों ने इसे भी धोखाधड़ी करार दिया है और पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच व 22 दिसंबर की जनसुनवाई तत्काल रद्द करने की मांग की है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।
