बिलासपुर। पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी या दूसरी महिला को पत्नी के रूप में रखने के मामलों में महिलाओं को दूसरी शादी साबित करने में काफी कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा कि कई मामलों में पहली पत्नी को खुद गवाह और दस्तावेज जुटाने पड़ते हैं, जबकि दूसरी महिला पत्नी होने से ही इनकार कर देती है।

बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में डॉ. साहू ने बताया कि आयोग अब प्रदेशभर के ऐसे मामलों की केस स्टडी तैयार करेगा। पुलिस, न्यायिक क्षेत्र, विधि विशेषज्ञों, महिला एवं बाल विकास विभाग, एनजीओ और मीडिया से सुझाव लेकर दूसरी शादी से जुड़े कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद कानून में आवश्यक बदलाव के लिए सरकार को अनुशंसा भेजी जाएगी।

महिला आयोग अध्यक्ष ने यह भी कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस और न्यायपालिका के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार किए जाएंगे। भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 और 69 के तहत आने वाले मामलों की भी पुलिस अधिकारियों और हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के साथ समीक्षा होगी। आयोग का उद्देश्य महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में आने वाली कानूनी और व्यावहारिक अड़चनों को दूर करना है।

अगर इसे और क्राइम चैनल वाली आक्रामक हेडिंग में करना हो तो मुख्य लाइन होगी: “दूसरी शादी छिपाकर बच निकलना अब आसान नहीं! सबूतों की पेचीदगी पर महिला आयोग बदलेगा कानून”
