17 अगस्त 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर: दांतों की सड़न और दर्द को मामूली समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है। ऐसा ही मामला सिम्स बिलासपुर के दंत चिकित्सा विभाग में सामने आया, जहां 38 वर्षीय महिला के जबड़े में पुरानी सड़न और संक्रमण के कारण बनी बड़ी रेडिकुलर सिस्ट का सफल उपचार किया गया। खास बात यह रही कि आधुनिक तकनीक की मदद से सिस्ट को आसपास की स्वस्थ हड्डी को अनावश्यक नुकसान पहुंचाए बिना निकाला गया। मरीज का पूरा उपचार आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क किया गया।
महिला जबड़े में सूजन की शिकायत लेकर सिम्स पहुंची थी। चिकित्सकों ने डिजिटल एक्स-रे और सीबीसीटी जांच के जरिए बीमारी की पहचान की। जांच में प्रभावित दांत की जड़ के आसपास जबड़े की हड्डी का बड़ा हिस्सा सिस्ट से प्रभावित पाया गया।
पुरानी सड़न और संक्रमण ने बनाया सिस्ट:दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र कश्यप के अनुसार रेडिकुलर सिस्ट दांत की जड़ के आसपास बनने वाली तरल पदार्थ से भरी थैली होती है। यह सामान्यतः लंबे समय से सड़े या संक्रमित दांत के कारण विकसित होती है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन समय के साथ मसूड़े या जबड़े में सूजन, दांत का रंग बदलना, चबाने में दर्द और गंभीर स्थिति में चेहरे की बनावट में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
दो चरणों में हुआ उपचार:चिकित्सकों ने उपचार को दो चरणों में पूरा किया। पहले संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित दांत की रूट कैनाल थेरेपी की गई। इसके बाद छोटे चीरे के जरिए सर्जिकल एन्यूक्लिएशन की प्रक्रिया से सिस्ट को पूरी तरह बाहर निकाला गया। इस दौरान आसपास की हड्डी को अनावश्यक क्षति से बचाया गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है और प्रभावित जबड़े की हड्डी धीरे-धीरे स्वस्थ होने की दिशा में है।
निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के बाद सिम्स बना सहारा:मरीज ने पहले निजी अस्पतालों में उपचार के लिए संपर्क किया था, लेकिन अधिक खर्च के कारण इलाज नहीं करा सकी। बाद में सिम्स में उपचार की जानकारी मिलने पर यहां पहुंची, जहां आयुष्मान योजना के तहत उसका उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया गया।
चिकित्सकों ने दी अहम सलाह:दंत चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश ने कहा कि दांत में सड़न, संक्रमण या चोट के कारण होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच से ऐसी बीमारियों की पहचान शुरुआती अवस्था में की जा सकती है और बड़ी सर्जरी की जरूरत को टाला जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से हर छह महीने में दंत जांच कराने की अपील की।
इस सफल उपचार में डॉ. भूपेंद्र कश्यप के मार्गदर्शन में डॉ. संदीप प्रकाश, डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी कोनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे और डॉ. सोनल पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति और अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने चिकित्सकीय टीम की सराहना करते हुए आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को प्रोत्साहित किया।
संदेश साफ है–दांत का दर्द या सड़न मामूली समझकर टालना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
