रायगढ़। तमनार के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में करीब तीन साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराकर दो-दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) की अदालत ने हत्या, आपराधिक साजिश और साक्ष्य मिटाने के अपराध में यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार 19 जुलाई 2023 की रात ग्राम गोढ़ी में पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडे व अन्य हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। वारदात के बाद एक शव को सड़क तक घसीटकर दुर्घटना का रूप देने की भी कोशिश की गई थी।
घटना के बाद तमनार पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की। तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए, हथियार बरामद किए और गवाहों के बयान दर्ज किए। वहीं अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत आगे की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी दीपक मिश्रा ने पूरी कर मजबूत आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कराया।
मुकदमे के दौरान विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। अदालत में 22 गवाहों, 81 दस्तावेजी साक्ष्यों और 20 भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध हुए।
न्यायालय ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषी मानते हुए दो-दो आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि गंभीर अपराधों की वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन प्रक्रिया का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि गंभीर अपराधों में दोषियों को कठोर सजा दिलाई जा सके।
सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
