13 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ एवं साहित्यकार डॉ. दिलीप कुमार दास ने कहा कि मानसिक रोगों के उपचार में केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मरीज के साथ आत्मीय व्यवहार, पर्याप्त समय, काउंसलिंग और मनोचिकित्सकीय परामर्श ही सफल उपचार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाकर ही समाज को अवसाद, तनाव और अन्य मानसिक बीमारियों से बचाया जा सकता है।

बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. दास ने बताया कि वर्ष 1998 में दिल्ली में चार वर्षों तक सेवाएं देने के बाद उन्होंने रायपुर के एमएमआई हॉस्पिटल से चिकित्सा जीवन की शुरुआत की और वर्ष 2001 से अपोलो हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं। पिछले 29 वर्षों में उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में 350 से अधिक निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित किए हैं।
बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर सरायपाली, बसना, अंबिकापुर, मनेन्द्रगढ़ और विश्रामपुर तक उन्होंने हजारों लोगों को निःशुल्क परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में वे प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक अपोलो हॉस्पिटल में मरीजों का उपचार करते हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अपने निजी क्लिनिक में रियायती शुल्क पर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। पिछले पांच वर्षों में उनके निजी क्लिनिक में आने वाले लगभग 50 प्रतिशत मरीजों को निःशुल्क ओपीडी परामर्श दिया गया है।

डॉ. दास ने कहा कि मनोरोग चिकित्सा में दवाइयों की भूमिका केवल 25 से 30 प्रतिशत होती है, जबकि 70 प्रतिशत सफलता काउंसलिंग, मनोचिकित्सा और मानवीय व्यवहार पर निर्भर करती है। वे मरीजों को साहित्य, प्रेरक प्रसंग, संतों की वाणी, कविताओं और सकारात्मक संवाद के माध्यम से मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास एवं संवेदनशीलता का रिश्ता ही उपचार को प्रभावी बनाता है।
उन्होंने बताया कि अब तक वे चार लाख से अधिक मरीजों का परामर्श कर चुके हैं और उचित उपचार, काउंसलिंग तथा मरीज के सहयोग से उनके लगभग 90 प्रतिशत मरीज सामान्य जीवन में लौटे हैं।
पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. दिलीप कुमार दास की लिखी पुस्तकों का विमोचन बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर सचिव संदीप करिहार, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह, सह-सचिव हरिकिशन गंगवानी तथा कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव उपस्थित रहे। पत्रकारों ने डॉ. दास के साहित्यिक और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े योगदान की सराहना की।
डॉ. दास ने अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा, 350 से अधिक निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों के अनुभव, चार लाख से अधिक मरीजों के परामर्श, नई पुस्तक के विमोचन तथा आगामी 6 दिसंबर को हैदराबाद में मिलने वाले प्रतिष्ठित “रेफरेंस बुक ऑफ द ईयर” सम्मान की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
