23 जून 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में क्या कानून सबके लिए बराबर है, या फिर रसूखदारों के लिए नियमों की अलग किताब चलती है? यह सवाल इन दिनों शहर के बीचों-बीच संचालित हो रहे चर्चित ‘LIT (Life In Trance)’ क्लब को लेकर जोर-शोर से उठ रहा है। ओल्ड बस स्टैंड स्थित होटल हेवन पार्क का यह क्लब एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा खत्म होने के बाद भी यहां देर रात तक शराब और संगीत की महफिलें सजती रहीं, जबकि प्रशासनिक नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आए।
शनिवार की रात करीब 1 बजे तक क्लब में रौनक बरकरार रही। इसके अगले ही दिन रविवार को भी वही तस्वीर दोहराई गई। शहर के प्रमुख व्यावसायिक और रिहायशी इलाके के बीच स्थित इस क्लब में देर रात तक लोगों की आवाजाही, शराब पार्टी और शोरगुल जारी रहने की खबरों ने आसपास के रहवासियों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में नियमों को इतनी खुली चुनौती दी जा रही है?

खबर प्रकाशित हुई तो जागा सिस्टम, लेकिन कार्रवाई कहां हुई?
सूत्रों के अनुसार क्लब के देर रात तक संचालन की खबर सार्वजनिक होने के बाद पुलिस की टीम रात लगभग 1 बजे होटल परिसर पहुंची। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। न कोई सख्त वैधानिक कार्रवाई हुई और न ही नियम उल्लंघन पर कोई प्रभावी कदम उठाया गया।
लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में समय सीमा का उल्लंघन हो रहा था तो केवल समझाइश देकर लौट जाना किस कानून का हिस्सा है? क्या आम दुकानदार या छोटे व्यवसायी के मामले में भी इतनी ही नरमी दिखाई जाती? यही सवाल अब शहरभर में चर्चा का विषय बन गया है।

विवादों का अड्डा बन चुका है ‘LIT’ क्लब?
यह पहला मौका नहीं है जब होटल हेवन पार्क और उसका ‘LIT’ क्लब विवादों में घिरा हो। पिछले कुछ वर्षों में इस परिसर का नाम कई सनसनीखेज घटनाओं में सामने आ चुका है। हालात ऐसे हैं कि अब लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी है कि क्लब मनोरंजन का केंद्र कम और विवादों का केंद्र अधिक बन गया है।
1. नेताओं और ठेकेदारों का जुआ फड़, पुलिस पर भी उठे थे सवाल
बार सील होने के बाद हुई एक छापेमारी में होटल के भीतर से कई रसूखदार लोगों को लाखों रुपये के साथ जुआ खेलते पकड़ा गया था। बाद में कुछ प्रभावशाली लोगों को छोड़ने की चर्चा ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
2. लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से खूनी हमला
मई 2023 में होटल के बाहर हुए एक चर्चित हमले में बदमाशों ने युवकों पर जानलेवा हमला किया था। अदालत ने मामले में 12 आरोपियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी थी।

3. व्यवसायी की बेरहमी से पिटाई
रायपुर के एक व्यवसायी के साथ क्लब में हुई मारपीट और उसके बाद थाने में हुए हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना ने क्लब की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया था।
4. बाउंसरों की दबंगई और चाकूबाजी
एंट्री विवाद को लेकर बाउंसरों द्वारा युवकों की पिटाई, बेसबॉल बैट से हमला और बाद में चाकूबाजी जैसी घटनाओं ने क्लब की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया था।
5. अवैध हुक्का और वीडियो बनाने पर हमला
एक ग्राहक द्वारा हुक्का संचालन का वीडियो बनाए जाने पर उसके साथ मारपीट और मोबाइल तोड़ने का मामला भी सामने आया था, जिसने होटल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे।
6. चापड़ लहराते युवक का वायरल वीडियो
मार्च 2024 में वायरल हुए वीडियो में होटल परिसर के भीतर एक युवक खुलेआम धारदार हथियार लहराते हुए दिखाई दिया था। वीडियो ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी थी।
रिहायशी इलाके में बढ़ रही दहशत, रहवासियों का फूटा गुस्सा
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि देर रात तक तेज संगीत, शराब पार्टी और नशे में बाहर निकलने वाले लोगों की गतिविधियों से पूरे इलाके का माहौल प्रभावित हो रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।
रहवासियों का आरोप है कि सप्ताहांत में रात 2 बजे तक गतिविधियां चलती हैं, जिससे पूरे इलाके की शांति भंग होती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना भी हो सकती है।
अब उठ रही बड़ी मांग—सीसीटीवी जांच हो, सच सामने आए
शहर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और आसपास के रहवासियों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आबकारी विभाग से मांग की है कि क्लब परिसर और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच कराई जाए। यदि निर्धारित समय सीमा के बाद संचालन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल?
जब छोटे व्यापारियों पर नियमों का डंडा चलता है, तब क्या रसूखदार प्रतिष्ठानों के लिए कानून की धार कुंद हो जाती है?
क्या न्यायधानी में नियमों से बड़ा प्रभाव और पहुंच बन चुका है?
और यदि नहीं, तो फिर बार-बार विवादों में घिरने वाले इस क्लब पर अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब का इंतजार सिर्फ आसपास के रहवासियों को नहीं, बल्कि पूरी न्यायधानी को है।
— सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
