
बिलासपुर। जीवन की अंतिम यात्रा पर निकलते हुए भी विनोबा नगर निवासी 93 वर्षीय स्वर्गीय आर्य रूपचंद जीवनानी मानवता की ऐसी मिसाल कायम कर गए, जिसने शोक को उम्मीद और अंधेरे को उजाले में बदल दिया। मंगलवार सुबह उनके निधन के बाद परिवार ने संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए उनका नेत्रदान कराया, जिससे अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों की दुनिया रोशन हो सकेगी।
गमगीन माहौल के बीच उनके पुत्र भगवानदास जीवनानी, द्वारिका (कालू) जीवनानी, नंदलाल जीवनानी एवं अन्य परिजनों ने साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय लेते हुए नेत्रदान का संकल्प लिया। परिवार ने इस नेक पहल के लिए हैंड्स ग्रुप से संपर्क किया, जिसके बाद संस्था के सदस्य तत्काल सक्रिय हो गए।
सूचना मिलते ही हैंड्स ग्रुप के मनीष जीवनानी और अन्य सदस्य सिम्स अस्पताल की मेडिकल टीम के साथ जीवनानी परिवार के निवास पहुंचे। टीम में डॉ. अनिकेत कांबले, नेत्रदान सलाहकार धर्मेंद्र देवांगन एवं मुकेश शामिल रहे। मेडिकल प्रक्रिया को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न किया गया।
स्वर्गीय रूपचंद जीवनानी का यह निर्णय अब दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आएगा। परिवार के इस मानवीय कदम की शहरभर में सराहना की जा रही है।
इस अवसर पर हैंड्स ग्रुप के सदस्यों ने लोगों से नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि आज भी अनेक बच्चे, युवा और बुजुर्ग दृष्टिहीनता के अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं और किसी संवेदनशील पहल का इंतजार कर रहे हैं।
संस्था ने कहा, “नेत्रदान केवल एक दान नहीं, बल्कि किसी के जीवन में उजाला भरने का सबसे बड़ा माध्यम है। एक व्यक्ति का संकल्प दो जिंदगियों को नई उम्मीद दे सकता है।”
