21 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। दोनों उस समय सिम्स पुलिस चौकी में पदस्थ थे और आरोप है कि वे हीरा खांडे के संगठित गिरोह का हिस्सा बनकर फर्जी सर्पदंश प्रकरण तैयार कराने में अहम भूमिका निभा रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों में रामकुमार पाटनवार (40 वर्ष), निवासी बंधवापारा, सरकंडा तथा रामेश्वर भास्कर (53 वर्ष), निवासी सतनाम नगर, अमेरी शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि जब भी किसी व्यक्ति का शव पोस्टमार्टम के लिए सिम्स अस्पताल पहुंचता था, तब ये दोनों पुलिसकर्मी तत्काल गिरोह के सदस्य महेन्द्र मनहर को इसकी सूचना देते थे। सूचना मिलते ही महेन्द्र मनहर अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों से संपर्क करता और उन्हें शासन से मिलने वाली सर्पदंश आपदा सहायता राशि का लालच देकर मौत का कारण सर्पदंश बताने के लिए तैयार करता था, जबकि कई मामलों में मौत किसी अन्य वजह से हुई होती थी।
पुलिस के अनुसार, लालच में आकर कई परिजन भी इस साजिश का हिस्सा बन जाते थे। मुआवजे की राशि का एक हिस्सा उन्हें मिलता, जबकि शेष राशि गिरोह के सदस्यों के बीच बांटी जाती थी। इस तरह शासन के आपदा राहत कोष को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे मृतकों के परिजनों को तैयार कराने में भी सक्रिय सहयोग करते थे। इसी आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस अब दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि पूछताछ में घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं और इस पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।
सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
