20 जुलाई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर में कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। इस मामले में पुलिस ने सिम्स में पदस्थ रहीं महिला डॉक्टर डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, डॉक्टर ने दो अलग-अलग मामलों में मौत का कारण कथित रूप से फर्जी तरीके से सर्पदंश दर्शाते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की, ताकि मृतकों के परिजन सरकारी मुआवजा प्राप्त कर सकें।
मामले का खुलासा तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत मिलने पर पुलिस ने महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत से जुड़ी फाइलों की दोबारा जांच की। जांच में सामने आया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था और रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सर्पदंश बताया गया था। पुलिस की वैज्ञानिक और दस्तावेजी जांच में ये रिपोर्टें संदिग्ध मिलीं, जिसके बाद डॉक्टर के खिलाफ अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई।
पुलिस का दावा है कि यह मामला केवल फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी मुआवजा हड़पने के लिए सक्रिय एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। जांच में पहले ही वकीलों, बैंक कर्मियों, बिचौलियों, मृतकों के परिजनों और अन्य लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है। अब तक 16 मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और डॉ. प्रियंका सोनी की गिरफ्तारी के साथ कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसएसपी रजनेश सिंह के अनुसार, वर्ष 2019 से फरवरी 2024 के बीच स्वीकृत सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस को छापेमारी के दौरान डायरी, तैयार दस्तावेज, सील और अन्य रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें कथित रूप से फर्जी प्रकरण तैयार करने, बैंक खाते खुलवाने और मुआवजे की राशि के बंटवारे तक का विवरण दर्ज है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण कुछ और था, लेकिन कथित रूप से सर्पदंश दर्शाकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कराई गई और उसके आधार पर सरकारी मुआवजा प्राप्त किया गया। पुलिस को संदेह है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कई अन्य डॉक्टरों की भूमिका भी हो सकती है। फिलहाल 15 अन्य संदिग्ध मामलों की जांच जारी है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है। जांच पूरी होने के बाद इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जी मुआवजा घोटालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
सीजी क्राइम रिपोर्टर, प्रधान संपादक
