07 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री रमेश सिन्हा ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत (9 मई 2026) की तैयारियों की वर्चुअल बैठक में समीक्षा की। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को लंबित प्रकरणों के त्वरित और सहमति-आधारित निपटारे के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए, साथ ही उच्चतम न्यायालय की पहल “समाधान समारोह” को सफलतापूर्वक लागू करने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में राज्य के सभी प्रधान जिला न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अधिकारी, परिवार न्यायालयों के न्यायाधीश, स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्ष, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सहित अन्य न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की उपस्थिति भी रही।
मुख्य न्यायाधीश ने निर्देशित किया कि पुराने लंबित सिविल एवं आपराधिक मामलों में सुलह योग्य प्रकरणों की पहचान कर उन्हें लोक अदालत के माध्यम से निपटाया जाए। विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, परक्राम्य लिखत अधिनियम तथा मोटर दुर्घटना दावा से जुड़े मामलों पर फोकस करने को कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारी पूर्व-बैठक के माध्यम से पक्षकारों को समझाइश देकर समझौते की संभावनाएं बढ़ाएं।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के दिशा-निर्देशों के तहत 9 मई 2026 को उच्च न्यायालय से लेकर तहसील एवं अन्य न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। इसमें सिविल, आपराधिक सुलह योग्य मामलों सहित जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का निपटारा किया जाएगा। अब तक राज्य में 31,90,982 मामलों की पहचान की गई है, जिनमें 31,14,779 प्री-लिटिगेशन और 76,203 न्यायालयों में लंबित प्रकरण शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने “समाधान समारोह” अभियान के तहत विशेष लोक अदालतों के सफल आयोजन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार, समय पर नोटिस तामील और अधिकतम प्रकरणों के निपटारे हेतु समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। यह अभियान 21 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर अगस्त 2026 में विशेष लोक अदालतों के साथ संपन्न होगा, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।
