फर्जी ईमेल, व्हाट्सएप और बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रचा गया हाईटेक फ्रॉड
03 अप्रैल 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/चकरभाठा
बिलासपुर: चकरभाठा पुलिस ने एक बड़े और सुनियोजित साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए करोड़ों की ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने विदेशी निवेश और डिमांड ड्राफ्ट क्लियरेंस के नाम पर एक व्यक्ति से 3 करोड़ 13 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली।
विदेशी निवेश का लालच, फिर शुरू हुआ ठगी का खेल
प्रार्थी को साल 2024 की शुरुआत में एक विदेशी नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला, जिसमें खुद को ग्रेट ब्रिटेन का “डॉ. लोव्हीत” बताया गया। बाद में “ग्रेस डेविड” नाम की महिला से संपर्क कराया गया, जिसने भारत में कैंसर अस्पताल, ब्लाइंड इंस्टीट्यूट, रियल एस्टेट और लॉ कॉलेज में करीब 500 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया।
इस बड़े ऑफर के झांसे में आकर प्रार्थी को पार्टनर बनाने का लालच दिया गया और लगातार बातचीत के जरिए भरोसे में लिया गया।

डिमांड ड्राफ्ट के नाम पर करोड़ों की उगाही
आरोपियों ने स्कॉटलैंड बैंक से 103 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जारी होने का दावा करते हुए उसके “क्लियरेंस” के नाम पर अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे मांगने शुरू किए।
कभी एंबेसी, कभी आरबीआई, तो कभी कस्टम और प्रवर्तन निदेशालय की प्रक्रिया बताकर रकम ऐंठी जाती रही।
इस तरह प्रार्थी ने अपने और परिवार के खातों से पहले लाखों और बाद में आरोपी के खाते में किस्तों में कुल 3.13 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बैंकिंग ज्ञान का गलत इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि आरोपी नवीन जून (निवासी सोनीपत, हरियाणा) बैंक में डायरेक्ट सेलिंग एजेंट रह चुका है और उसे बैंकिंग सिस्टम की पूरी जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर उसने फर्जी ईमेल आईडी बनाईं और खुद को बैंक, एंबेसी और अन्य संस्थाओं का अधिकारी बताकर पीड़ित को गुमराह करता रहा।
पुलिस कार्रवाई में क्या मिला
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से—
Thar और Venue कार
मोबाइल फोन
टैबलेट
लैपटॉप
जब्त किए हैं, जो इस हाईटेक ठगी के अहम सबूत हैं।
आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की तलाश जारी
मुख्य आरोपी नवीन जून को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस को इस मामले में और लोगों की संलिप्तता का शक है, जिनकी तलाश जारी है।
विदेशी निवेश, लॉटरी या बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर आने वाले ऑफर्स से सतर्क रहें। बिना सत्यापन किसी भी व्यक्ति या संस्था को पैसे ट्रांसफर करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।