19 मार्च 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/लिंगियाडीह
लिंगियाडीह में मकान तोड़ने की कार्रवाई पर सियासत गरम, हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें”””आज महाआंदोलन की बरसी “”1वर्ष हुऐ पुरे,,,, महा आंदोलन परिवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार,,,,,
बिलासपुर के वार्ड क्रमांक 52, दुर्गानगर लिंगियाडीह में गरीब परिवारों के मकान और दुकानों को हटाने की कार्रवाई अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। एक ओर जहां स्थानीय लोग इसे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं, वहीं प्रशासन और नगर निगम इसे नियमों और कोर्ट के निर्देशों के तहत की गई वैध कार्रवाई बता रहे हैं। पूरा मामला अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के विचाराधीन है।

🤔 क्या है पूरा मामला?🤔
लिंगियाडीह के दुर्गानगर क्षेत्र में 40-50 वर्षों से रह रहे करीब 150 परिवारों के मकान तोड़े जाने का आरोप लगाया गया है।
विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए अटल श्रीवास्तव ने सरकार से सवाल किया कि—
कितने मकान और दुकान तोड़े गए?
कितने और तोड़े जाने प्रस्तावित हैं?
प्रभावित परिवारों का पुनर्वास कहां किया गया?
प्रशासन का जवाब: “अवैध कब्जा हटाया गया”
नगर निगम बिलासपुर ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि—
अपोलो हॉस्पिटल रोड को 24 मीटर चौड़ा करने का मास्टर प्लान है
खसरा नं. 15/149 और 198/25 शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा था
इस कारण सड़क संकरी होने से मरीजों को दिक्कत हो रही थी

मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (W.P. PIL 29/2025) के बाद कार्रवाई तेज हुई।
नगर निगम ने
206 मकान-दुकानों का सर्वे किया
धारा 322/323 के तहत नोटिस जारी किए
नियमानुसार समय देने के बाद
18 मीटर दायरे में अतिक्रमण हटाया
🏚️ कितने लोगों को मिला पुनर्वास?🏚️
कार्रवाई के दौरान—

49 पात्र परिवारों को बहतराई में I.H.S.D.P योजना के तहत पुनर्वास
113 परिवारों का सर्वे कर प्रधानमंत्री आवास योजना (AHP) में शामिल करने की प्रक्रिया जारी
👉 यानी अभी भी बड़ी संख्या में परिवारों का पुनर्वास लंबित है।
पट्टा और प्रीमियम का विवाद?
यह मामला और पेचीदा तब हो गया जब सामने आया कि—
2019-2024 के बीच 124 परिवारों का पट्टा सर्वे हुआ
यही बिंदु अब विवाद का मुख्य कारण बन गया है।
47 परिवारों ने प्रीमियम राशि भी जमा की
लेकिन किसी को पट्टा जारी नहीं हुआ
विपक्ष का आरोप: “गरीबों को बेघर किया गया”
विधानसभा शून्यकाल में आरोप लगाया गया कि—
करीब 150 परिवार बेघर हो गए
2.46 एकड़ भूमि पहले आबादी घोषित थी
निगम “अनावश्यक और अवैधानिक” कार्रवाई कर रहा है
वहीं दुर्गानगर के लोग लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने पर बैठे हैं।
⚖️ कोर्ट में क्या चल रहा है?
मामले से जुड़े दो बड़े केस इस समय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं—
WPC No. 6175/2025 (पिंकी देवांगन व अन्य)
WPC No. 372/2026 (सावित्री साहू व अन्य)
इन याचिकाओं में कार्रवाई की वैधता और पुनर्वास की मांग उठाई गई है।
🤨 रोचक तथ्य (Quick Facts)
📍 206 मकानों/दुकानों का सर्वे
📍 18 मीटर दायरे में हटाया गया अतिक्रमण
📍 49 परिवारों को मिला पुनर्वास
📍 113 परिवारों का पुनर्वास अभी बाकी
📍 47 परिवारों ने पट्टा राशि जमा की, लेकिन पट्टा नहीं मिला
🤔 बड़ा सवाल🤔
क्या वाकई यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई है?
या गरीबों के अधिकारों की अनदेखी?
क्या बिना पट्टा दिए मकान तोड़ना न्यायसंगत है?
🫴 अब आगे क्या?🫴
पूरा शहर अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहा है।
यह फैसला न केवल प्रभावित परिवारों की किस्मत तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।
✍️निष्कर्ष✍️?
लिंगियाडीह का यह मामला सिर्फ सड़क चौड़ीकरण बनाम अतिक्रमण का नहीं, बल्कि गरीबों के आवास अधिकार, प्रशासनिक प्रक्रिया और न्यायिक हस्तक्षेप का बड़ा उदाहरण बन चुका है।
अब सभी की निगाहें🤔 माननीय हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय⚖️ पर टिकी हुई हैं — क्या मिलेगा न्याय या जारी रहेगा विवाद
