09 मार्च 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर/मुंगेली/सरगांव। छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान को तब बड़ा झटका लगा जब उसे पता चला कि जिस जमीन पर वह वर्षों से खेती कर रहा है, वही जमीन कागजों में किसी और के नाम दर्ज हो चुकी है। मामला Madku Village का है, जहां 1.88 एकड़ कृषि भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का आरोप सामने आया है।
जानकारी के अनुसार दसवनकांपा निवासी 41 वर्षीय किसान अरुण कुमार चेलकर ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन की बिना सहमति के फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा दी गई। यह जमीन ग्राम मदकू के प.ह.नं. 39 में स्थित है, जिसमें खसरा नंबर 345/1, 345/4 और 354 शामिल हैं और कुल रकबा 1.88 एकड़ बताया गया है। किसान का दावा है कि 14 नवंबर 2025 को उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही जमीन का कागजी विक्रय कर दिया गया।

फर्जी पहचान बनाकर रजिस्ट्री का आरोप
शिकायत में बिलासपुर के तीन लोगों के नाम सामने आए हैं—
कृष्ण नाथानी, रवि मोटवानी और सचिन पारवानी। आरोप है कि फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को “अरुण कुमार” बनाकर रजिस्ट्री कार्यालय में प्रस्तुत किया गया और जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई। इस प्रक्रिया में दो कथित गवाहों निलेश स्टेली और संतोष कुमार भगत (सागर, मध्यप्रदेश) के नाम भी सामने आए हैं।
तहसीलदार की सतर्कता से खुला मामला
बताया जा रहा है कि मामला तब सामने आया जब नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त तहसीलदार कार्यालय द्वारा इश्तहार जारी किया गया। इसी इश्तहार के जरिए किसान को अपनी जमीन के कागजी विक्रय की जानकारी मिली।
सरगांव के तहसीलदार अतुल वैष्णव ने बताया कि नामांतरण के लिए प्रस्तुत आवेदन प्रथम दृष्टया संदिग्ध लगा। इसके बाद इश्तहार जारी कराया गया, जिस पर आपत्ति आने के बाद पूरे मामले की जांच की गई और नामांतरण प्रकरण को खारिज कर दिया गया। साथ ही संबंधित पक्ष को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई।

पुलिस जांच की मांग
पीड़ित किसान ने पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल निजी धोखाधड़ी नहीं बल्कि सरकारी दस्तावेजों के साथ गंभीर छेड़छाड़ का मामला है।
गांव में आक्रोश का माहौल
घटना के सामने आने के बाद ग्राम मदकू और आसपास के क्षेत्रों में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक किसान की जमीन इस तरह कागजों में बेची जा सकती है तो आम लोगों की संपत्ति की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।

आरोपों को बताया निराधार
वहीं इस मामले में नाम सामने आने पर कृष्ण नाथानी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने इस मामले में पहले ही शिकायत दर्ज कराई है और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है।
अब इस पूरे प्रकरण में सबकी निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस कथित फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित किसान को न्याय मिल पाएगा।
