03फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर….
न्यायधानी बिलासपुर
चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इसी परंपरा को 135 वर्षों से निभा रही है वाघ बकरी चाय। सन 1892 में अहमदाबाद (गुजरात) से शुरू हुई वाघ बकरी चाय की खुशबू और स्वाद ने समय के साथ देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बना ली है। कभी अंग्रेजों की पसंद बनी यह चाय, आज आज़ादी के बाद देशवासियों की पहली पसंद बन चुकी है।

गुजरात से निकलकर देश के लगभग सभी बड़े शहरों, छोटे कस्बों और अब गांवों तक अपनी पहुंच बना चुकी वाघ बकरी चाय आज भी लगातार उत्पादन के साथ लोगों का विश्वास जीत रही है। इसी कड़ी में BNI व्यापार उद्योग मेला, बिलासपुर में वाघ बकरी चाय का आकर्षक स्टॉल लगाया गया है, जहां चाय प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

स्टॉल पर वाघ बकरी की पारंपरिक चाय पत्ती के साथ-साथ विभिन्न नई वैरायटी भी उपलब्ध कराई गई हैं। खास बात यह है कि चाय खरीदने से पहले लोगों को वहीं पर चाय का टेस्ट भी कराया जा रहा है, जिससे उपभोक्ता स्वाद से संतुष्ट होकर खरीदारी कर रहे हैं। प्रतिदिन हजारों लोग स्टॉल पर पहुंचकर चाय का आनंद ले रहे हैं और अपने पसंद की चाय पत्ती अपने साथ ले जा रहे हैं।

स्टॉल संचालक मिथलेश पांडे ने बताया कि वे पिछले 12 वर्षों से लगातार व्यापार मेला में वाघ बकरी चाय का स्टॉल लगा रहे हैं और हर साल उन्हें बेहतरीन प्रतिसाद मिल रहा है। इस वर्ष भी पुराने ग्राहकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नए उपभोक्ता वाघ बकरी चाय का स्वाद लेकर इससे जुड़ रहे हैं। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के लिए अलग-अलग टेस्ट और बजट में चाय पत्ती उपलब्ध है। साथ ही ग्राहकों के लिए डिस्काउंट और गिफ्ट ऑफर भी दिए जा रहे हैं।


उल्लेखनीय है कि वाघ बकरी चाय आज भारत सहित 60 से अधिक देशों में पसंद की जा रही है। बीते चार दिनों से मेले में लगातार लोगों की भीड़ उमड़ रही है, जो इस ब्रांड के प्रति लोगों के भरोसे और स्वाद की लोकप्रियता को दर्शाता है।
135 वर्षों से कायम यह स्वाद और विश्वास आज भी बरकरार है। जिन लोगों ने अब तक वाघ बकरी चाय का स्वाद नहीं चखा है, उनके लिए यह मेला एक सुनहरा अवसर है—एक बार चखेंगे, तो खुद महसूस करेंगे कि वाघ बकरी चाय अन्य चाय पत्तियों से क्यों अलग है। इसमें स्वाद भी है, अपनापन भी—जो पीने से भी महसूस होता है और पिलाने से भी।
