January 20, 2026
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16 दिसम्बर 2025

सीजी क्राइम रिपोर्टर……

बिलासपुर/ Search, Seizure, Preservation of Electronic Evidence and Cyber Forensics विषय पर बिलासपुर जिले में एक दिवसीय रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज डॉ. संजीव शुक्ला (IPS) के निर्देश पर आयोजित की गई, जिसमें बिलासपुर रेंज के 8 जिलों के राजपत्रित अधिकारी, विवेचक, रेंज साइबर थाना एवं ACCU के अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यशाला में राज्य फॉरेंसिक प्रयोगशाला, छत्तीसगढ़ रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. विक्रांत सिंह ठाकुर द्वारा डिजिटल साक्ष्य संकलन, सर्च, सीजर एवं उनके सुरक्षित संरक्षण से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, पेन ड्राइव, ई-मेल, मैसेज, ऑडियो-वीडियो जैसे डिजिटल साक्ष्यों की जांच एवं फॉरेंसिक प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

बताया गया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79-क के अंतर्गत केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच के लिए सक्षम घोषित किया गया है। इसके साथ ही रायपुर एफएसएल में हाईटेक साइबर फॉरेंसिक एवं ऑडियो-वीडियो प्रयोगशाला की सुविधा प्रारंभ हो गई है, जो मध्य भारत की एकमात्र NABL प्रमाणित प्रयोगशाला है। इससे अब डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो गई है।

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह (भापुसे) ने कहा कि आधुनिक समय में अपराध और अपराधी दोनों डिजिटल हो गए हैं। विवेचना में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील होते हैं, जिनका संकलन और संरक्षण विशेष सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षण के लाभ को जिले के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि रायपुर एफएसएल को धारा 79-क का प्रमाणन मिलने से अब मोबाइल, कंप्यूटर, क्लाउड डेटा, डिलीट डेटा, ऑडियो-वीडियो फॉरेंसिक, फेस व वॉइस मैचिंग, डाक्यूमेंट फॉरेंसिक जैसे सभी कार्य राज्य में ही संभव हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि अपराधों के नियंत्रण और दोषसिद्धि के लिए डिजिटल फॉरेंसिक एक प्रभावी हथियार है, जिसका अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।

कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मधुलिका सिंह, श्री राजेन्द्र जायसवाल, श्रीमती दीपमाला कश्यप, डॉ. अर्चना झा, श्री हरीश यादव, श्रीमती निमिषा पाण्डेय, श्रीमती नवनीत कौर छाबड़ा सहित विभिन्न जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।