13 अगस्त 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/SECL
बिलासपुर। भूमि के बदले रोजगार से जुड़ी शिकायतों के निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति संबंधित प्रकरणों में उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर होंगे। वहीं महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) और उप-महाप्रबंधक (विधि) समिति के सदस्य होंगे।
समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करने के साथ अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करेगी। शिकायतों का परीक्षण प्रचलित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप किया जाएगा, जिससे मामलों के त्वरित और तार्किक निस्तारण में मदद मिलेगी।
एसईसीएल के अनुसार भूमि के बदले रोजगार में अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों को लेकर कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के साथ शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए शिकायतकर्ताओं से अपील की गई है कि वे केवल प्रमाणित तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज करें तथा बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं और भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक और सद्भावनापूर्वक की गई शिकायतों को हतोत्साहित नहीं किया जाएगा। हालांकि, यदि जांच में कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान या नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई पाई जाती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 217 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 215(1)(a) सहित अन्य लागू विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
एसईसीएल ने कहा है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था से भूमि के बदले रोजगार से जुड़ी शिकायतों की जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय होगी। इससे वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास और संस्थागत जवाबदेही भी मजबूत होगी।
