24 जून 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान एवं आलिम मुफ्ती मुख्तार अशरफ ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और विविधता में एकता की भावना में निहित है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए मंदिर-मस्जिद और धार्मिक विवादों से अधिक शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मुफ्ती अशरफ ने कहा कि इस्लाम का पहला संदेश ही “पढ़ो” था, जो शिक्षा के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि समाज की अधिकांश समस्याओं की जड़ अशिक्षा है और जब तक शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ेगा, तब तक सामाजिक और आर्थिक विकास अधूरा रहेगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी तथा अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें और देश निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
मुफ्ती अशरफ ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के लोग सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। संविधान के दायरे में रहकर देश और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि कुरान का संदेश है कि बुराई का जवाब भलाई से दिया जाए और मानवता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने महाराष्ट्र के भिवंडी में आयोजित नीट परीक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि एक मदरसे द्वारा विभिन्न समुदायों के अभिभावकों के लिए भोजन, पानी और विश्राम की व्यवस्था की गई थी। यह पहल न केवल मानवता की मिसाल थी, बल्कि समाज में आपसी विश्वास, प्रेम और सौहार्द को मजबूत करने वाला संदेश भी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास ही देश की सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान जिहाद को लेकर पूछे गए सवाल पर मुफ्ती अशरफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिहाद का वास्तविक अर्थ आतंकवाद या हिंसा नहीं, बल्कि सकारात्मक संघर्ष और समाज सुधार का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अशिक्षा, भ्रष्टाचार, अन्याय, नशाखोरी और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष करना ही वास्तविक जिहाद है। माता-पिता की सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, शिक्षा प्राप्त करना और समाज के कल्याण के लिए कार्य करना भी जिहाद की भावना का हिस्सा है।
उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से एक-दूसरे की आस्था, संस्कृति और त्योहारों का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि सहिष्णुता, सहयोग और आपसी सम्मान ही शांति और राष्ट्रीय एकता की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि यदि देश के सभी नागरिक शिक्षा, मानवता और सामाजिक सद्भाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, तो भारत विश्व के सबसे मजबूत और विकसित राष्ट्रों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।
प्रेसवार्ता में शेख नजीरुद्दीन, मौलाना मजहर खान, अब्दुल रज्जाक, हबीब मेमन, हाजी अब्दुल रिजवान सहित बड़ी संख्या में सामाजिक एवं धार्मिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
