19 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर:शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सिम्स अस्पताल बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने एक अत्यंत दुर्लभ, जटिल और जोखिमपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 45 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया है। चिकित्सकों की टीम ने 27 सप्ताह के गर्भ के बराबर आकार की विशाल संक्रमित गांठ को सफलतापूर्वक निकालकर मरीज की जान बचाई। इस सफलता को सिम्स अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और डॉक्टरों की दक्षता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, दुजी बाई (45 वर्ष) को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल जीपीएम से सिम्स रेफर किया गया था। मरीज पिछले दो वर्षों से लगातार पेट दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव, कमजोरी और शारीरिक असहजता से जूझ रही थीं। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि गर्भाशय के मुंह में लगभग 15×14 सेंटीमीटर आकार का विशाल सर्वाइकल फाइब्रॉइड पॉलीप विकसित हो चुका था।

डॉक्टरों के मुताबिक यह गांठ अत्यधिक संक्रमित थी और आकार में लगभग 27 सप्ताह के गर्भ के बराबर हो चुकी थी। गांठ के कारण पेशाब की नली, पेट के निचले हिस्से और किडनी पर लगातार दबाव पड़ रहा था, जिससे मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। संक्रमण और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते मामला जानलेवा स्थिति में पहुंच चुका था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. संगीता रमन जोगी के नेतृत्व में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित की गई। कई घंटों तक चली इस हाई-रिस्क सर्जरी को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमन जोगी, सह प्राध्यापक डॉ. दीपिका सिंह, डॉ. रचना जैन, डॉ. सोमा वेंकट एवं वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. आकृति यादव ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।
ऑपरेशन के दौरान विशाल गांठ को दो अलग-अलग हिस्सों में अत्यंत सावधानीपूर्वक निकाला गया। सर्जरी के समय अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण का लगातार खतरा बना हुआ था, वहीं पेशाब की नली सहित आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती थी। बावजूद इसके डॉक्टरों की टीम ने अनुभव, कुशलता और धैर्य का परिचय देते हुए ऑपरेशन को सफल बनाया।
इस जटिल सर्जरी में बेहोशी विभाग की भी अहम भूमिका रही। विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. श्वेता एवं डॉ. मिल्टन ने पूरी सर्जरी के दौरान मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखते हुए महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
वर्तमान में मरीज सिम्स अस्पताल के स्त्री रोग वार्ड में भर्ती हैं और उनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी रिकवरी संतोषजनक है और जल्द ही उन्हें स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया जा सकेगा।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स अस्पताल में लगातार जटिल और दुर्लभ सर्जरियों का सफल उपचार किया जा रहा है। यह उपलब्धि डॉक्टरों की टीमवर्क, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और मरीजों के प्रति समर्पण का परिणाम है।
वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी, लेकिन डॉक्टरों की अनुभवी टीम ने समय पर निर्णय लेकर इस कठिन सर्जरी को सफल बनाया।
विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमन जोगी ने बताया कि इस प्रकार के मामले अत्यंत दुर्लभ होते हैं और इनमें मरीज की जान को गंभीर खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास और विशेषज्ञता के कारण ही यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल हो सका।
