09 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/बिल्हा
बिलासपुर:बिल्हा क्षेत्र के बटोरी गांव में आवारा कुत्ते के हमले ने दो मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में डाल दी। महज दो वर्षीय बालक और दो वर्षीय बालिका पर हुए इस दर्दनाक हमले में दोनों बच्चों के चेहरे, आंखों और पलकों पर गंभीर चोटें आईं। परिजन तत्काल बच्चों को सिम्स अस्पताल बिलासपुर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की तत्परता और विशेषज्ञ उपचार से दोनों बच्चों की आंखों की रोशनी बचाई जा सकी।
सिम्स के नेत्र रोग विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत आपातकालीन उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार यह “कैटेगरी-3 डॉग बाइट” का मामला था, जिसमें रेबीज संक्रमण का खतरा बेहद अधिक रहता है। अस्पताल पहुंचते ही घावों की गहन सफाई की गई और तत्काल एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) शुरू की गई। साथ ही संक्रमण रोकने के लिए रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी लगाया गया।
बच्चों की पलकों और आंखों के आसपास गहरे जख्म होने के कारण उसी दिन नेत्र रोग ऑपरेशन थिएटर में “अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी” की गई। डॉक्टरों ने बेहद सूक्ष्मता से क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत कर आंखों की संरचना और दृष्टि को सुरक्षित रखने का सफल प्रयास किया। फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
इस जटिल सर्जरी और उपचार में डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. आरती, डॉ. अनिकेत, निश्चेतना विभाग से डॉ. यशा तिवारी और डॉ. द्रोपती सहित मेडिकल एवं नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि डॉग बाइट जैसे मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। वहीं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने लोगों से झाड़-फूंक और घरेलू उपचार से बचकर वैज्ञानिक चिकित्सा अपनाने की अपील की।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह ने बताया कि बच्चों की आंखों पर गंभीर चोट थी, इसलिए तत्काल सर्जरी करना आवश्यक था। विशेषज्ञ टीम की सतर्कता से बच्चों की दृष्टि बचाने में सफलता मिली।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नगर निगम और प्रशासन से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, नसबंदी अभियान तेज करने और रेबीज जागरूकता अभियान चलाने की मांग भी की है।
