02 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर: पथरी के इलाज के लिए अमेरी रोड स्थित श्री राम केयर अस्पताल में भर्ती एक आरक्षक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से हड़कंप मच गया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम एरमसाही निवासी सत्या पाटले सरकंडा थाना में आरक्षक के पद पर पदस्थ थे और तिफरा स्थित पुलिस कॉलोनी में रहते थे। पेट दर्द की शिकायत के बाद जांच में पथरी की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्होंने 28 अप्रैल को अमेरी रोड स्थित श्री राम केयर अस्पताल में भर्ती होकर ऑपरेशन कराया था। परिजनों को डॉक्टरों द्वारा तीन दिन में छुट्टी देने का आश्वासन भी दिया गया था।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे सत्या की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उल्टी और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत पर परिजनों ने अस्पताल स्टाफ को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि करीब 5 घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं पहुंचा। बाद में डॉक्टर पहुंचे और डायलिसिस की सलाह दी, लेकिन कुछ ही देर बाद सत्या की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। मृतक की पत्नी ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ऑपरेशन के बाद सत्या पूरी तरह ठीक थे, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी जान चली गई।

मृतक के मित्र और सहकर्मी आशीष कुर्रे ने भी मामले को संदिग्ध बताते हुए कहा कि पथरी जैसे सामान्य ऑपरेशन में मौत होना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने स्थिति को लेकर परिजनों को गुमराह किया।
वहीं मृतक के बड़े भाई ओमप्रकाश कुर्रे ने कहा कि इलाज के नाम पर लापरवाही बरती गई और अब अस्पताल प्रबंधन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा। चाचा मेघनाथ खांडेकर ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इधर, सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्या ने बताया कि सत्या उनके थाने में पदस्थ थे और इलाज के लिए छुट्टी पर थे। उनकी मौत दुखद है।
सिविल लाइन पुलिस के अनुसार मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत कर आंदोलन करेंगे।
घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और जांच पर अब सभी की नजर टिकी हुई है।
फिलहाल मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
