13 मार्च 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
नई दिल्ली। 13 वर्षों से कोमा में जीवन-मृत्यु के बीच जूझ रहे 31 वर्षीय हरीश राणा को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिल गई है। अदालत ने उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम और फीडिंग ट्यूब हटाने की मंजूरी देते हुए कहा कि अब प्रकृति को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
यह महत्वपूर्ण फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुनाया। निर्णय सुनाते समय कोर्ट भी भावुक नजर आया। पीठ ने अपने आदेश में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को आधार बनाया, जिसमें साफ कहा गया था कि हरीश राणा के स्वस्थ होने की कोई संभावना नहीं बची है।
दरअसल, वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में एक हादसे के दौरान चौथी मंजिल से गिरने से हरीश राणा के सिर में गंभीर चोट लगी थी। इस दुर्घटना के बाद उनका शरीर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गया और वे कोमा की स्थिति में चले गए। तब से लेकर अब तक वे पूरी तरह से जीवन रक्षक उपकरणों और ट्यूब के जरिए दिए जा रहे तरल आहार पर निर्भर थे।
हरीश के वृद्ध माता-पिता ने बेटे की पीड़ा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जीवन रक्षक उपचार बंद करने की अनुमति मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मेडिकल विशेषज्ञों की राय, रिपोर्ट और सभी पक्षों की दलीलों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी। अदालत के इस फैसले को मानवीय संवेदना और कानून के संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
