26 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। न्यायधानी के जिला अस्पताल परिसर स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में डिलीवरी के बाद परिजनों से कथित रूप से पैसे मांगने का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्टाफ नर्स द्वारा 1000 रुपए की मांग करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नर्सों को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, प्रसूति वार्ड में डिलीवरी के बाद महिला के परिजन नर्स को धन्यवाद दे रहे थे। इसी दौरान नर्स ने कथित रूप से कहा कि “धन्यवाद से काम नहीं चलेगा”, और पैसों की मांग की। परिजनों द्वारा 500 रुपए देने की बात कहने पर भी नर्स ने 1000 रुपए से कम लेने से इंकार कर दिया। वीडियो में यह भी कहा गया कि अस्पताल में ग्लव्स और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस मामले में स्टाफ नर्स लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया के नाम सामने आए हैं। घटना का वीडियो सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन ने दोनों को लेबर ओटी से हटाया और बाद में निलंबन की कार्रवाई की गई।
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि पीड़ित परिवार से एडमिशन फॉर्म भरने के नाम पर भी 100 रुपए लिए गए। हालांकि प्रसूति कक्ष के बाहर लगे सूचना बोर्ड में स्पष्ट रूप से लिखा है कि किसी भी कर्मचारी द्वारा पैसे मांगने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करें, क्योंकि बिना रसीद भुगतान करना दंडनीय है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें डॉ. प्रतीक प्रधान, डॉ. ममता सलूजा और डॉ. नवीन साव शामिल हैं। समिति मामले की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो वायरल होने के बाद इसे सोशल मीडिया से हटा लिया गया, लेकिन तब तक यह व्यापक रूप से फैल चुका था। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं
