🔷“न्याय तक समान पहुंच संविधान का संकल्प” – मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा
08 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (CGSLSA) द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी (CSJA) के सहयोग से लीगल एड डिफेंस कौंसिल के लिए एक दिवसीय रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रोग्राम का तीसरा सत्र छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि लीगल एड डिफेंस कौंसिल सिस्टम न्याय तक पहुंच को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत प्रदत्त संवैधानिक जनादेश को मूर्त रूप देती है, जिसके माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण विधिक सहायता सुनिश्चित की जाती है।
मुख्य न्यायाधीश ने चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल एवं डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधिक सहायता की गुणवत्ता सीधे तौर पर न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। उन्होंने प्रतिभागियों से सक्रिय सहभागिता, अनुभवों के आदान-प्रदान एवं व्यावहारिक चुनौतियों पर सार्थक चर्चा करने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण — न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु एवं न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में राज्य भर से चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल एवं डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल सहित कुल 74 प्रतिभागियों ने भाग लिया। स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा दिया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण तथा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
🔷यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
