05 जनवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर…..
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में नववर्ष पर स्थापित अत्याधुनिक C-ARM मशीन ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इस मशीन की सहायता से सिम्स में पहला जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया, जिससे अब गंभीर हड्डी रोग एवं सड़क दुर्घटना के मरीजों को इलाज के लिए रायपुर या निजी अस्पतालों की ओर भटकना नहीं पड़ेगा।
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर C-ARM मशीन का ऑपरेशन थिएटर में शुभारंभ किया गया। इसके बाद मशीन का उपयोग जटिल शल्यक्रियाओं में प्रारंभ हुआ। उल्लेखनीय है कि बीते लगभग 7 वर्षों से सिम्स में C-ARM मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण हर साल 100 से 150 गंभीर ऑर्थोपेडिक एवं ट्रॉमा मरीजों को रेफर करना पड़ता था, लेकिन अब यह समस्या समाप्त हो गई है।
इसी कड़ी में C-ARM मशीन से पहला जटिल ऑपरेशन सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज खेदु दास (40 वर्ष), निवासी देवरीडीह, जिला बिलासपुर पर किया गया। जानकारी के अनुसार 27 दिसंबर 2025 को मोटरसाइकिल से घर लौटते समय व्यापार विहार स्थित दुर्गा मंदिर के पास एक ऑटो से उनकी जोरदार टक्कर हो गई थी। दुर्घटना में उनके दाहिने पैर की हड्डी टूटकर बाहर निकल गई थी, जो अत्यंत गंभीर स्थिति थी।

ऑर्थोपेडिक विभाग की अनुभवी टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार करते हुए हड्डी को अंदर स्थापित कर बाहर से रॉड लगाकर पैर को फिक्स किया, जिससे संक्रमण का खतरा कम किया जा सका। घाव भरने के बाद 5 जनवरी 2026 को C-ARM मशीन की मदद से मरीज की टीबिया नेलिंग (अंदर से रॉड डालकर हड्डी जोड़ने) की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। C-ARM तकनीक के माध्यम से सर्जरी के दौरान हड्डी की सटीक स्थिति प्रत्यक्ष देखी जा सकी, जिससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित और प्रभावी रहा।
इस सफल शल्यक्रिया में ऑर्थोपेडिक विभाग से डॉ. ए. आर. बैन, डॉ. संजय घिल्ले, डॉ. अविनाश अग्रवाल एवं डॉ. प्रवीण द्विवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं एनेस्थीसिया विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. भावना राय ज्यादा एवं डॉ. बर्मन द्वारा कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन एवं सतत निगरानी की गई।
इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि नववर्ष पर प्राप्त C-ARM मशीन सिम्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिससे अब जटिल से जटिल हड्डी रोग एवं ट्रॉमा मामलों का उपचार यहीं संभव हो सका है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि इस मशीन के आगमन से सर्जरी की सफलता दर बढ़ी है और मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं।
वहीं ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बैन ने कहा कि C-ARM मशीन से टीबिया नेलिंग जैसी जटिल सर्जरी अब अधिक सटीकता और आत्मविश्वास के साथ की जा रही है, जिससे जटिलताओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
चिकित्सकों के अनुसार मरीज की वर्तमान स्थिति स्थिर एवं संतोषजनक है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
सिम्स में स्थापित यह अत्याधुनिक C-ARM मशीन अब सड़क दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर हड्डी रोगियों के लिए नई आशा, नया विश्वास और नया जीवन लेकर आ रही है
