04 अगस्त 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर(कुमार पोपटानी की खास खबर)शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले सरकारी स्कूलों की बदहाली की यह तस्वीर सिर्फ व्यवस्था की नाकामी नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता की भी गवाही दे रही है। ग्राम पंचायत निरतु के डिपरा पारा प्राथमिक शाला की हालत इतनी भयावह हो चुकी है कि पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाओं के बच्चों को मजबूरी में एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पांच अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई एक ही कमरे में कैसे संभव है? क्या बच्चों के भविष्य के साथ यही न्याय है?

स्कूल के बाकी कमरों की स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता देती नजर आती है। दीवारें टेढ़ी हो चुकी हैं, भवन पूरी तरह जर्जर है, शौचालय और रसोईघर की हालत भी बदहाल है। यह स्कूल कम और उपेक्षा का प्रतीक ज्यादा दिखाई देता है।

स्कूल की प्रधान पाठक मंजुलता बंसल ने बताया कि जर्जर भवन को ध्वस्त कर नया भवन बनाने के लिए शिक्षा विभाग और जिला पंचायत को काफी पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। इससे सवाल उठता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी फाइलें किसकी मेज पर धूल खा रही हैं?

टाइल्स लगीं, लेकिन नया स्कूल नहीं… आखिर किसकी प्राथमिकता?
पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस भवन को तोड़कर नया बनाया जाना था, उसी जर्जर भवन में फर्श पर टाइल्स लगा दी गईं। जब भवन स्वयं असुरक्षित घोषित होने की स्थिति में है, तब उसमें टाइल्स लगाने का औचित्य क्या था? क्या सरकारी राशि का उपयोग सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए किया गया?

इस संबंध में जब प्रधान पाठक मंजुलता बंसल से सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। बाद में उन्होंने कहा कि टाइल्स लगाने का कार्य महिला सरपंच के निर्देश पर कराया गया। इसके बाद उन्होंने आगे कुछ भी कहने से बचने की कोशिश की। इस दौरान लगातार मोबाइल फोन आने लगे, जिससे पूरे मामले को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

बच्चों की सुरक्षा या भ्रष्ट व्यवस्था?
आज मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदारों की प्राथमिकता जर्जर भवन की मरम्मत या नया निर्माण नहीं, बल्कि फर्श पर टाइल्स लगवाना दिखाई देती है। यदि भविष्य में इस भवन में कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?


यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि उस सोच का है जिसमें बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से ज्यादा महत्व कागजी कामों और संदिग्ध खर्चों को दिया जाता है। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित जांच एजेंसियां पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करें और प्राथमिकता के आधार पर नए स्कूल भवन का निर्माण कराएं, ताकि मासूम बच्चों का भविष्य और जीवन दोनों सुरक्षित रह सकें।
सीजी क्राइम रिपोर्टर ✍️ प्रधान संपादक
