
19 मई 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। गैस, एसिडिटी, फैटी लिवर, कब्ज, अल्सर, इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), लिवर एवं पैंक्रियास संबंधी रोग अब युवाओं में भी सामान्य होते जा रहे हैं। ऐसे में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने अत्याधुनिक गैस्ट्रो केयर सुविधाओं का विस्तार करते हुए मरीजों को महानगरों जैसी चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी पहल की है।

अस्पताल में आयोजित प्रेस वार्ता में संस्था प्रमुख अभय कुमार गुप्ता ने बताया कि अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में अब एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), एसोफेगल मैनोमेट्री, कैप्सूल एंडोस्कोपी, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक एवं थैरेप्यूटिक एंडोस्कोपी तथा जीआई सर्जरी जैसी आधुनिक सुविधाएँ शुरू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य बिलासपुर एवं आसपास के लोगों को अपने ही शहर में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर रुख न करना पड़े।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीआरएनबी प्रोग्राम भी शुरू किया जाएगा, जिससे यह संस्थान भविष्य में विशेषज्ञ गैस्ट्रो चिकित्सकों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित होगा।


वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि अपोलो हॉस्पिटल की शुरुआत के समय कोलकाता से लेकर बिलासपुर तक कोई गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं था, जबकि आज अस्पताल में संपूर्ण गैस्ट्रोएंटरोलॉजी केयर टीम कार्यरत है। उन्होंने बताया कि अब तक विभाग में लगभग 1 लाख 22 हजार ओपीडी मरीजों, 24 हजार इन-पेशेंट्स का उपचार तथा करीब 61 हजार गैस्ट्रो प्रक्रियाएँ की जा चुकी हैं। अस्पताल वर्तमान में उत्तरी छत्तीसगढ़ के 14 जिलों, मध्यप्रदेश के 4 जिलों तथा ओडिशा के 3 जिलों के मरीजों को सेवाएँ प्रदान कर रहा है।

डॉ. सीतेंदू पटेल ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड तकनीक के माध्यम से भोजन नली, पेट, पित्त नली, अग्नाशय एवं अंदरूनी ट्यूमर की अत्यंत सूक्ष्म जांच संभव हो सकेगी, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाया जा सकेगा।
डॉ. आकाश गर्ग ने कहा कि एसोफेगल मैनोमेट्री जांच निगलने में कठिनाई, सीने में जलन और लगातार एसिड रिफ्लक्स की समस्या वाले मरीजों के लिए बेहद उपयोगी है।
वहीं डॉ. समर्थ शर्मा ने कैप्सूल एंडोस्कोपी को आधुनिक एवं बिना दर्द वाली जांच पद्धति बताते हुए कहा कि इसमें मरीज को कैमरेयुक्त एक छोटा कैप्सूल निगलना होता है, जो छोटी आंत की तस्वीरें लेकर उन बीमारियों का भी पता लगाने में मदद करता है, जो सामान्य एंडोस्कोपी में दिखाई नहीं देतीं।
जीआई सर्जन डॉ. लाजपत अग्रवाल ने कहा कि नई आधुनिक मशीनों के समावेश से बीमारी के सटीक निदान और जटिल सर्जरी में बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, सिग्मायडोस्कोपी, फ्लोरोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन, लिवर बायोप्सी, ईआरसीपी और स्क्लेरोथेरेपी जैसी सुविधाएँ पहले से उपलब्ध हैं। अब नई अत्याधुनिक तकनीकों के जुड़ने से मरीजों को एक ही स्थान पर संपूर्ण गैस्ट्रो एवं जीआई सर्जरी सेवाएँ मिल सकेंगी।
विशेषज्ञों ने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय पर भोजन की आदत अपनाने की अपील की। साथ ही लगातार पेट दर्द, एसिडिटी, भूख में कमी, वजन घटना, निगलने में परेशानी या मल त्याग में अनियमितता जैसी समस्याएँ होने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने आभार व्यक्त किया।
