14 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/चकरभाठा
श्री झूलेलाल मंदिर चकरभाठा में शनिवार को सनातन संस्कृति, श्रद्धा और पारिवारिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब पूज्य संत साईंलाल दास जी के पावन सानिध्य में 41 बटुकों का विधिवत जनेऊ संस्कार सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर माता-पिता पूजन दिवस भी श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाया गया, जिसने पूरे वातावरण को संस्कार, भक्ति और सम्मान से ओतप्रोत कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे भगवान झूलेलाल एवं बाबा गुरुमुख दास जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात पंडित पुरन शर्मा जी ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ सभी 41 बटुकों को जनेऊ धारण करवाया। यह पवित्र संस्कार हिंदू धर्म के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक है, जो व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन और कर्तव्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

इस अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश जैसवानी ने जनेऊ संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जनेऊ केवल एक धागा नहीं, बल्कि धर्म, अनुशासन और आत्मिक जागरण का प्रतीक है। उन्होंने भगवान झूलेलाल के अवतार की कथा का उल्लेख करते हुए सिंधी समाज में जनेऊ और चोटी के महत्व को समझाया तथा बटुकों को इसे सदैव सम्मानपूर्वक धारण करने की प्रेरणा दी। पंडित पुरन शर्मा जी ने भी गायत्री मंत्र के नियमित जाप और जनेऊ के प्रत्येक सूत्र एवं गांठ के आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी।
दोपहर 1 बजे माता-पिता पूजन दिवस का आयोजन हुआ, जिसमें जनेऊ धारण करने वाले सभी बटुकों ने अपने माता-पिता का तिलक कर, माला पहनाकर, आरती उतारकर और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इस भावुक क्षण ने उपस्थित सभी लोगों की आंखों को नम कर दिया और माता-पिता के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया।

संत साईंलाल दास जी ने अपने अमृत वचनों में कहा कि आज का दिन अत्यंत पावन और हर्ष का दिन है। उन्होंने कहा कि आज के युवा और बच्चे ऐसे कार्य करें जिससे उनके माता-पिता का नाम गर्व से ऊंचा हो और कभी भी ऐसा कार्य न करें जिससे उनके माता-पिता का सिर शर्म से झुक जाए। उन्होंने कहा कि माता-पिता का ऋण सात जन्मों में भी नहीं चुकाया जा सकता और उनके चरणों में ही चारों धाम का वास है। माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा तीर्थ है।
उन्होंने युवाओं को अपनी संस्कृति, भाषा और धर्म से जुड़े रहने, नियमित अध्ययन करने, सेवा भाव अपनाने और संतों के सत्संग से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। साथ ही मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बचने और स्वस्थ एवं संस्कारित जीवन जीने का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम के दौरान अनिल पंजवानी एवं रवि रुपवानी द्वारा सिंधी भजन और लेडीज संगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में झूम उठे। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम के अंत में संत साईंलाल दास जी ने सभी बटुकों को शाल और माला पहनाकर आशीर्वाद प्रदान किया। इस आयोजन का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसे हजारों लोगों ने घर बैठे देखा। इस पावन संस्कार में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित विभिन्न स्थानों से बटुक और उनके परिजन शामिल हुए।
इस भव्य और संस्कारपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में बाबा गुरुमुख दास सेवा समिति, झूलेलाल महिला सखी सेवा ग्रुप के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा। यह आयोजन न केवल सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बना, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार, सेवा और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का प्रेरणादायक माध्यम भी सिद्ध हुआ।

इस कार्यक्रम को कवरेज करने के लिए सीजी क्राइम रिपोर्टर के प्रधान संपादक कुमार पोपटानी विशेष रूप से चकरभाठा उपस्थित रहे और पूरे आयोजन को कवरेज किया। संत साईं लाल दास जी के द्वारा उनका सम्मान किया गया और आशीर्वाद दिया।
