11 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
न्यायधानी बिलासपुर/थाना तोरवा
तोरवा क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी की असमय मृत्यु ने न केवल एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंतन की आवश्यकता भी सामने ला दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली में एक युवक की मौत की खबर मिलने के बाद से किशोरी गहरे सदमे में थी।
किशोरी मूल रूप से बैकुंठपुर की रहने वाली थी और कुछ समय से बिलासपुर में अपनी बुआ के घर ठहरी हुई थी। बताया जाता है कि हाल ही में वह एक परिचित युवक के साथ दिल्ली चली गई थी, जहां से परिजन उसे वापस लेकर आए थे। पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उसे तोरवा स्थित रिश्तेदार के यहां रखा गया था।
रविवार को दिल्ली से युवक की मृत्यु की सूचना मिली। परिजनों के अनुसार, इस खबर के बाद से किशोरी का व्यवहार बदल गया था। वह अधिकतर समय चुप रहती, किसी से खुलकर बात नहीं करती और सामान्य दिनचर्या से दूरी बनाने लगी थी। परिवार ने उसे समझाने और संभालने की कोशिश की, लेकिन उसके भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष को पूरी तरह समझ पाना संभव नहीं हो सका।
सोमवार सुबह उसने घरवालों के साथ समय बिताया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह दुखद घटना सामने आई। सूचना पर पहुंची तोरवा पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस दिल्ली से जुड़े तथ्यों और किशोरी की हालिया गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किशोर मन कितना संवेदनशील होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में भावनात्मक झटके गहरा प्रभाव छोड़ सकते हैं। अभिभावकों को केवल अनुशासन नहीं, बल्कि संवाद, सहानुभूति और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच में जुटी है, जबकि क्षेत्र में शोक और संवेदना का माहौल बना हुआ है।
