10 फरवरी 2026
सीजी क्राइम रिपोर्टर
राजधानी रायपुर/न्यायधानी बिलासपुर
बिलासपुर, 9 फरवरी 2026।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने गठन के 31वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से उभरते राज्य के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग केवल सड़कें नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति की जीवनरेखा बन चुके हैं। बीते वर्षों में एनएचएआई ने राज्य के भूगोल पर विकास की ऐसी रेखाएं खींची हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ को देश के लॉजिस्टिक और औद्योगिक हब के रूप में सशक्त पहचान दिलाई है।
आज राज्य की आधुनिक फोरलेन और सिक्स-लेन सड़कें गंतव्य तक पहुंचने का साधन ही नहीं, बल्कि उद्योग, कृषि, खनन, पर्यटन और निवेश के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रही हैं।
वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन: एनएच-53
एशियाई मार्ग-46 का हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग-53 राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। महाराष्ट्र सीमा से ओडिशा सीमा तक राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर, आरंग और सरायपाली को जोड़ने वाला यह फोरलेन मार्ग औद्योगिक गतिविधियों को वैश्विक पहचान दे रहा है। आरंग के समीप महानदी पर निर्मित एक किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन ब्रिज इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
राजधानी से ऊर्जा नगरी तक ‘गोल्डन लिंक’
एनएच-130 के माध्यम से रायपुर, बिलासपुर और कोरबा को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क ने यात्रा समय को लगभग आधा कर दिया है। वहीं एनएच-149बी (चांपा-कोरबा-कटघोरा) ने कोयला और ऊर्जा क्षेत्र के परिवहन को नई गति दी है। अंबिकापुर से धमतरी तक फैला सड़क नेटवर्क दूरस्थ अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर
निर्माणाधीन 125 किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे समुद्री बंदरगाह से जोड़ेगा। इस परियोजना में राज्य की पहली 3 किलोमीटर लंबी स्मार्ट टनल विशेष आकर्षण है। यह कॉरिडोर बस्तर के घने वनों के बीच आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है।
फ्लाईओवर और आधुनिक इंटरचेंज
रायपुर का टाटीबंध चौक अब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के कारण सुगम और सुरक्षित यातायात का उदाहरण बन चुका है। बिलासपुर का पेंड्रीडीह इंटरचेंज भारी वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित कर आधुनिक कनेक्टिविटी का प्रतीक बना है।
औद्योगिक क्रांति का नया गलियारा
92 किलोमीटर लंबा दुर्ग-रायपुर-आरंग बायपास निर्माणाधीन है, जो मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर का हिस्सा होगा। वहीं 627 किलोमीटर लंबा रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारा, जिसमें 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ से गुजरता है, उद्योगों को नई ताकत देगा। इसके पूर्ण होने पर रायपुर से धनबाद की दूरी 11 घंटे से घटकर 7 घंटे रह जाएगी।
पर्यटन और आस्था को नई उड़ान
एनएच-53, एनएच-130 और एनएच-30 ने डोंगरगढ़, सिरपुर, बारनवापारा, रतनपुर, मैनपाट, राजिम और बस्तर जैसे प्रमुख पर्यटन एवं आस्था स्थलों तक पहुंच को सहज बनाया है। बेहतर सड़कों ने पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म दिया है।
सड़कों के साथ सामाजिक सरोकार
एनएचएआई केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रहा है। बिलासपुर के भेलमुड़ी और रतनपुर में केटल शेल्टर का निर्माण सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “मजबूत सड़कें किसी भी राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, कृषि, खनन और पर्यटन को नई गति मिली है। यही सड़कें आज छत्तीसगढ़ की प्रगति की पहचान बन रही हैं।”
उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा, “राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के कॉरिडोर बन चुके हैं। आधुनिक सड़क नेटवर्क से समय, ईंधन और लागत की बचत हो रही है, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं।”
एनएचएआई के 31वें स्थापना दिवस पर यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा अब और भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है—जहां हर सड़क भविष्य की ओर जाती
