07 दिसम्बर 2025
सीजी क्राइम रिपोर्टर……
रायपुर, 5 दिसंबर 2025।
लगभग एक माह से फरार चल रहे छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल ने शुक्रवार को रायपुर के देवेंद्र नगर थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत करने सहित कई गंभीर मामलों में वांछित अमित बघेल पर 12 राज्यों में FIR दर्ज है। आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

दोपहर लगभग 1 बजे अमित बघेल के थाना पहुंचते ही बड़ी संख्या में उनके समर्थक बाहर एकत्र हो गए। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। कुछ समय के लिए समर्थकों और पुलिस के बीच हल्की झड़प की स्थिति भी बनी, हालांकि हालात जल्द नियंत्रण में ले लिए गए।
मां के निधन के बाद किया आत्मसमर्पण
इसी बीच जानकारी सामने आई है कि अमित बघेल की मां का हाल ही में निधन हुआ है। उनके परिजनों के अनुसार, अंतिम संस्कार पैतृक गांव पथरी में किया जाएगा। अमित बघेल ने इसी आधार पर आत्मसमर्पण करते हुए अस्थायी जमानत की संभावना तलाशने का प्रयास किया है। फिलहाल वह पुलिस कस्टडी में रहते हुए ही अंतिम संस्कार में शामिल हो सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी फटकार
26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अमित बघेल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि, “अपनी जुबान पर लगाम रखें और जहां-जहां FIR दर्ज हैं, वहां की कानूनी प्रक्रिया का सामना करें।” कोर्ट ने किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया था।
12 राज्यों में दर्ज हैं मामले
अमित बघेल के खिलाफ छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, सरगुजा, धमतरी, रायगढ़ और जगदलपुर सहित अन्य राज्यों—मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र समेत कुल 12 राज्यों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार वह बीते 26 दिनों से लगातार लोकेशन बदल रहा था, जिससे उसकी गिरफ्तारी चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी। गिरफ्तारी में सहयोग करने वाले के लिए ₹5,000 का इनाम भी घोषित किया गया था।

विवादित बयानों से शुरू हुआ मामला
पूरा विवाद 27 अक्टूबर को तब शुरू हुआ था जब अमित बघेल ने अग्रसेन महाराज और सिंधी समाज के आराध्य देव झूलेलाल को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद अग्रवाल समाज और सिंधी समाज ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर थानों में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही अमित बघेल पर भयादोहन, अवैध वसूली और कथित ‘कांसा घोटाले’ से जुड़े आरोप भी दर्ज बताए जा रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल?
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों ने राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए हैं। हाल ही में प्रस्तावित ‘छत्तीसगढ़िया अस्मिता रैली’ को बिना अनुमति के आयोजित करने की कोशिश पर शासन-प्रशासन ने रोक भी लगाई थी।
फिलहाल पुलिस रिमांड में जांच जारी
अमित बघेल अब तीन दिन की पुलिस रिमांड पर है। इस दौरान पुलिस उनके फरारी के नेटवर्क, संभावित आर्थिक लेन-देन, साजिश और अन्य लंबित मामलों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
